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Bilaspur:  मूक बधिर बच्ची से दुष्कर्म करने वाले दोषी की सजा को कोर्ट ने ठहराया उचित, बच्चों ने दी गवाही

Fri, 02 Aug 2024 09:58 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर

सार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने बच्चों की गवाही के आधार पर दुष्कर्म के दोषी की सजा को उचित ठहराया है। हाईकोर्ट ने बच्चों की गवाही और एफएसएल (फोरेंसिक) रिपोर्ट को दोष सिद्धि के लिए पुख्ता साक्ष्य माना है।
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बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मानसिक रूप कमजोर मूक बधिर बच्ची से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने गांव के बच्चों की गवाही के आधार पर दोषी की सजा को उचित ठहराया है। अपने साथ हुए अपराध के बारे में पीड़िता ट्रायल कोर्ट को नहीं बता पाई, लेकिन उसके साथ के गांव के बच्चों ने पूरी सच्चाई बता दी। हाईकोर्ट ने बच्चों की गवाही और एफएसएल (फोरेंसिक) रिपोर्ट को दोष सिद्धि के लिए पुख्ता साक्ष्य माना है।

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साथ ही हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को यथावत रखा है। विचारण न्यायालय ने आरोपी को 376 (2) में 10 वर्ष, एट्रोसिटी एक्ट में उम्रकैद और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

धमतरी जिला क्षेत्र में रहने वाली मानसिक रूप से कमजोर मूक बधिर 3 अगस्त 2019 की दोपहर को गांव के अन्य बच्चों के साथ आरोपी चैन सिंह के घर टीवी देख रही थी। 3.30 बजे आरोपी आया और पीड़िता का हाथ पकड़कर दूसरे कमरे के अंदर ले गया। साथ ही टीवी देख रहे बच्चों ने बंद दरवाजा धक्का देकर खोला तो देखा कि आरोपी पीड़िता के साथ गलत काम कर रहा था। इसके बाद आरोपी उसे छोड़कर भाग गया। बच्चों ने इसकी जानकारी पीड़िता की मां को दी। 
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पीड़िता की मां ने देखा कि उसके हाथों की चूड़ी टूटी हुई थी, कपड़े भी ठीक से नहीं थे। मामले की रिपोर्ट लिखाई गई। मेडिकल जांच में डॉक्टर ने पीड़िता के मानसिक अस्वस्थ व मूक बधिर होने की रिपोर्ट दी। पुलिस ने कपड़े जब्त कर एफएसएल जांच के लिए भेजा। सुनवाई के बाद दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने आरोपी को 376 (2) में 10 वर्ष कैद, 5000 रुपये अर्थदंड तथा पीड़िता के अनुसूचित जनजाति वर्ग से होने पर एट्रोसिटी एक्ट में आजीवन कारावास व 5000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

आरोपी ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। आरोपी ने अपील में कहा कि उसे झूठे फसाया गया। पीड़िता का परीक्षण नहीं किया गया है। पीड़िता ने भी इस संबंध में कुछ नहीं कहा है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि पीड़िता मूक-बधिर और मानसिक रूप से फिट नहीं है, वह बोल भी नहीं सकती। इसलिए उससे गवाह के रूप में पूछताछ नहीं की गई। 

उसकी मां ने बताया है कि साथ गए बच्चों (गवाहों) ने पीड़िता को आरोपी द्वारा घर के अंदर खींचते देखा। बच्चों ने दरवाजे को धक्का दिया, तो देखा कि वह बलात्कार कर रहा था।  इसके अलावा, एफएसएल रिपोर्ट की रिपोर्ट से साबित होता है कि अपीलकर्ता ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया है।  इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी की अपील को खारिज कर दिया।

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