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Bijapur: जवानों की अनूठी पहल, भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किया पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम

Sat, 22 Jun 2024 08:06 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर (छत्तीसगढ़)

सार

जिले के गंगालुर थाना क्षेत्र के धुर नक्सल प्रभावित गांव पालनार पिछले दो दशकों से डर और हिंसा के साये में रहा हैं। दिसम्बर 2023 में पालनार में कैम्प खुलने के बाद क्षेत्र में चौड़ी सड़क, मोबाइल टावर और बिजली आपूर्ति के द्वार खुल गए।
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पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीजापुर में नक्सल मौर्चे पर तैनात सुरक्षाबल के जवान सुरक्षा के साथ समाज के भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने एक अनूठी पहल करते हुए पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम श्रृंखला आयोजित कर नौकरी के अवसर तलाश रहे युवाओं को मदद कॉलेज जाने वाले बच्चों के लिए कैरियर काउंसिलिंग कार्यक्रम कर बच्चों को खेल सामग्री व शिक्षण सामग्री का वितरण किया। 

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जिले के गंगालुर थाना क्षेत्र के धुर नक्सल प्रभावित गांव पालनार पिछले दो दशकों से डर और हिंसा के साये में रहा हैं। दिसम्बर 2023 में पालनार में कैम्प खुलने के बाद क्षेत्र में चौड़ी सड़क, मोबाइल टावर और बिजली आपूर्ति के द्वार खुल गए। पालनार कैम्प में कोबरा 202 व सीआरपीएफ 222 की तैनाती हैं। यहां तैनात जवानों को समय समय पर नक्सल विरोधी अभियान के लिए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। इसका मकसद क्षेत्र को नक्सलवाद के प्रभाव से पूरी तरह से मुक्त कर स्थानीय लोगों के बीच सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास पैदा करना, समाज के भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाना और क्षेत्र में विकास के द्वार खोलना है।

 

शिक्षा और विकास की राह में माओवादियों का बाधा बनकर खड़े होने से इस क्षेत्र में शिक्षा का स्तर काफी कम हैं। अशिक्षा के अंधकार को दूर करने के लिए कोबरा 202 ने क्षेत्र के बच्चों को बुनियादी शिक्षा प्रदान करने के विचार की कल्पना की। कैम्प में ही एक कक्षा चलाने का निर्णय लिया गया और कंपनी द्वारा निजी स्तर पर इसका प्रचार प्रसार किया गया। स्थानीय बच्चो को क्लास में भेजने के लिए सरपंच और गांव के अन्य प्रमुख और शिक्षित व्यक्तियों से संपर्क किया गया। 

 

पालनार में खुले कैम्प में रोजाना क्षेत्र के छोटे बच्चो को कैम्प में चलाये जा रहे शिक्षण के तरीके व मनोरंजन खेलकूद के लिए बच्चे कैम्प पहुंचते है। इसके अलावा कोबरा जवानों द्वारा क्षेत्र के लोगों के लिए कई अन्य गतिविधियां नौकरी के अवसर खोजने में मदद करने के लिए क्षेत्र के कॉलेज जाने वाले छात्रों की कैरियर काउंसिलिंग कर क्रिकेट व वॉलीबाल खेल सामग्री का वितरण किया गया। ज्ञात हो कि गंगालुर क्षेत्र का पालनार गांव तकनीकी प्रगति और आधुनिक जीवन शैली व प्रवृत्तियों से दूर रहने वाले आदिवासी संस्कृति और विरासत से समृद्ध गोंड लोगों की मुरिया उपजनजाति का घर हैं।

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