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Balod: छत्तीसगढ़ के पांच हजार गांवों तक पहुंचा श्रद्धा का स्टील बर्तन अभियान, 8 साल पहले हुई थी अभियान की शुरु

Fri, 10 May 2024 02:24 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद

सार

वर्षा साहू ने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक को सभी जगह पर बंद किया जाना चाहिए, मवेशी भी सिंगल यूज प्लास्टिक को खाते हैं और वह बीमार पड़ते हैं। इंसानों के साथ पशुओं की सुरक्षा भी हम सब की जिम्मेदारी है। 
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स्टील के बर्तनों में परोसा गया खाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धरती पर राज्य अगर सबसे बड़ी कोई समस्या है तो वह है कचरे की और वर्तमान समय में सिंगल यूज प्लास्टिक सबसे बड़ा कचरा बनता जा रहा है।  शादी हो या अन्य कोई कार्यक्रम  सिंगल यूज प्लास्टिक के कारण हर तरफ गंदगी नजर आती है मवेशी भी इसे खाकर बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे में बालोद की रहने वाली श्रद्धा साहू ने पिछले 8 साल पहले बर्तन बैंक नई पहल की नीव रखी जहां पर उन्होंने सामाजिक आयोजनों में मुफ्त में स्टेनलेस स्टील के बर्तन देना शुरू किया। अब यह जागरूकता एक अभियान बनकर उभर कर सामने आ रहा है। आज अक्षय तृतीया का पर्व है और इस पर्व में सबसे ज्यादा सात फेरे लिए जाते हैं। वैवाहिक आयोजनों में पहुंचकर श्रद्धा साहू स्टील बर्तन बैंक के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही हैं और मुफ्त में उन्हें स्टील बर्तन भी उपलब्ध करा रही हैं। पूरे जिले में 80 गांव प्रदेश में पांच हजार गांवों तक यह अभियान पहुंच चुका है।

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बालोद शहर के साहू परिवार में जब विवाह उत्सव हो रहा है तो वहां पर सिंगल उसे प्लास्टिक के किसी भी तरह का कोई बर्तन नहीं नजर आए परंतु श्रद्धा साहू द्वारा इस मुहिम से जुड़कर उनके द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक को ना करते हुए स्टील के बर्तन उपयोग किया जा रहा है। वह अन्य लोगों को भी स्टील बर्तन उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

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हर जगह से हटे प्लास्टिक

वर्षा साहू ने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक को सभी जगह पर बंद किया जाना चाहिए, मवेशी भी सिंगल यूज प्लास्टिक को खाते हैं और वह बीमार पड़ते हैं। इंसानों के साथ पशुओं की सुरक्षा भी हम सब की जिम्मेदारी है। 


एक छोटी पहल आज जन अभियान

श्रद्धा साहू ने बताया कि एक छोटी सी शुरुआत आज जन अभियान बनकर सामने आ रही है।  8 साल पहले हमने एक अभियान की शुरुआत की थी।  ऐसे में हमारा प्रयास अब रंग लाने लगा है उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश के 10 जिलों में हम इस अभियान की शुरुआत कर चुके हैं। लगभग 5000 गांव इससे प्रभावित हैं बालोद जिले की बात करें तो यहां पर 80 गांव में हम स्टील बर्तन बैंक से भोजन करने को लेकर प्रोत्साहित कर चुके हैं।

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सहूलियत बनता अभिशाप

तरुण साहू एवं श्रद्धा साहू ने बताया कि हम छोटी सी सहूलियत के लिए सिंगल उसे प्लास्टिक का उपयोग करते हैं परंतु यह धीरे-धीरे हमारे लिए अभिशाप बनती जा रही है जहां देखो प्लास्टिक की नजर आता है और इसे जलाने से वायु प्रदूषण होता है इस धरती ने हमें सब कुछ दिया है तो अब समय है कि हम भी इस धरती को अपना सर्वस्व लौट आए छोटी-छोटी पहल करके हम पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक कर सकते हैं।


 
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