छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य कर्मचारियों पर एस्मा लगाए जाने के विरोध में संविदा कर्मी सड़क पर उतर आए हैं। नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे संविदाकर्मियों ने शुक्रवार को बालोद और बीजापुर में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। फिर सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा प्रशासन को सौंप दिया है। इससे पहले बालोद में कर्मचारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नयाबस स्टैंड से कलेक्ट्रेट तक पहुंचे, लेकिन उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। इसके बाद एडीएम योगेंद्र श्रीवास आए और कर्मचारियों ने इस्तीफा सौंप दिया।
संविदाकर्मी बोले- वादा किया था, अब मुकर रहे
उमेश्वरि देशमुख ने बताया कि इससे पहले करीब 400 संविदा कर्मचारी रायपुर में इस्तीफा दे चुके हैं। इसके बाद आज 350 कर्मचारियों ने अपना इस्तीफा प्रशासन को सौंप दिया है। संविदा कर्मचारियों ने कहा कि पिछले चुनाव में हम मुख्यमंत्री के पास नहीं गए थे। वह हमारे आंदोलन स्थल पर आए और कहा था कि हमें सरकार में आने का मौका दो। 10 दिन के भीतर आपको रेगुलर करेंगे। उनके पांच साल के कार्यकाल में केवल दो महीना बचा हुआ है। इसमें भी वे अपने वादे से मुकर रहे हैं और संविदा कर्मचारियों को परेशान कर रहे हैं।
जो कर्मचारियों की सुनेगा, वही प्रदेश में राज करेगा
संविदा कर्मचारी तोमन आरदा ने बताया कि हम कभी भी डरने वाले नहीं हैं। चाहे सरकार एस्मा लगा दे। फिर बिना इमरजेंसी हालात के स्वास्थ्य कर्मियों पर एस्मा लगाया गया, जो कि बिल्कुल गलत है। यह हमारे संगठन और हमारी एकता को तोड़ने की एक साजिश है, लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ हम सभी संविदा कर्मचारी सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पहुंचे हैं। हम यह दावे के साथ कह सकते हैं कि, जो हम सब कर्मचारियों की बात सुनेगा, वही इस प्रदेश में राज करेगा।
हम डरने वाले नहीं हैं।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी जब कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े तो उनके पहुंचने से पहले ही रास्ते को बैरिकेट लगाकर बंद किया जा चुका था। वहां पर पुलिस और अफसरों की तैनाती थी। यह देखकर कर्मचारियों ने कहा कि, हम डरने वालों में से नहीं हैं। आज प्रशासन भी हमसे बात नहीं करना चाहता। सरकार भी हमसे बात नहीं करना चाहती तो आखिर हम किसके पास जाएं। सरकार जितना हमारे ऊपर दबाव डाल ले, पर हम टूटने वाले नहीं हैं। हम भले काम छोड़ देंगे लेकिन सरकार के दबाव में नहीं आएंगे।
बीजापुर में 700 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा
वहीं बीजापुर में भी 700 संविदा कर्मचारियों ने अपना इस्तीफा दे दिया है। छत्तीशगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष रमाकांत पुनेठा ने कहा कि लोकतंत्र में सम्मानपूर्वक काम और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। किंतु जब शासन की योजनाओं को धरातल पर लागू करने वाले कर्मचारियों को हर साल नौकरी से निकाले जाने का भय और कार्य के दौरान प्रशासनिक प्रताड़ना का प्रति दिन सामना करना पड़ता हो तो उनकी मनःस्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि, जब पीड़ित कर्मचारी अपनी पीड़ा दूर करने चुनावपूर्व किए गए सरकार के वादे को पूरा करने गुहार लगाते हैं तो उनको सुनने संवाद स्थापित करने की बजाय उनकी आवाज को दमनपूर्वक दबाया जाता है। छत्तीसगढ़ में सरकारें तो बदली पर हमारे भाग्य नहीं बदले। हम आज भी स्थायित्व और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिले में मनरेगा, आईसीडीएस, एनएचएम, डीआरडीए, पंचायत, कृषि, शिक्षा व एनआरएलएम सहित अन्य विभागों में कार्यरत संविदा कर्मी बीते 3 जुलाई से नियमितीकरण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं।