चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम कुबेरपुर में हुए सड़क हादसे और उसके बाद उपजे बवाल के मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने गांव पहुंचकर मृतक महिला के परिजनों से मुलाकात की और अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के स्पष्ट निर्देश दिए। मंत्री ने चेतावनी दी कि घटना के नाम पर ग्रामीणों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
हादसे में महिला की जान जाने के बाद कुबेरपुर गांव में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। हादसे की सूचना मिलने के बाद मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े खुद गांव पहुंचीं और पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने परिजनों से पूरी घटना की जानकारी ली और हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रैक्टर चालक के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही। इस दौरान ग्रामीणों ने इलाके में हो रहे कथित अवैध परिवहन का मुद्दा भी मंत्री के सामने उठाया।
मंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि जब हादसा दोपहर में हुआ था तो शाम तक प्रशासन की तरफ से क्या कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि मुख्य जिम्मेदार लोगों पर ध्यान दिए बिना केवल स्थानीय लोगों को निशाना बनाना सर्वथा अनुचित है।
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पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
आगजनी के बाद पुलिस कार्रवाई पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पुलिस बिना किसी ठोस आधार के लोगों को मामलों में फंसा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की ओर से एकतरफा कार्रवाई की जा रही है, जिससे निर्दोष लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों ने मंत्री से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, ताकि बेकसूर लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद मंत्री ने पुलिस के रवैये पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया और निष्पक्षता से काम करने की हिदायत दी।
साक्ष्य के बिना जेल न भेजने की चेतावनी
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने उपस्थित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई केवल ठोस साक्ष्य के आधार पर ही होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त सबूत के किसी भी ग्रामीण को हिरासत में न लिया जाए और न ही जेल भेजा जाए। हिरासत के दौरान मारपीट की शिकायतों पर भी उन्होंने अधिकारियों को चेताया और कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की आड़ में निर्दोषों के साथ ज्यादती नहीं होनी चाहिए।