अपराधियों की पहचान और गंभीर अपराधों की जांच में तेजी लाने के लिए दुर्ग पुलिस बड़े पैमाने पर बदमाशों के बायोमीट्रिक और फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड जुटा रही है। पुलिस ने अब तक मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (एमसीयू) में 2,153 और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) में 8,963 रिकॉर्ड दर्ज कर लिए हैं।
आपराधिक गतिविधियों, चाकूबाजी और अन्य गंभीर मामलों में संलिप्त बदमाशों का नियम के अनुसार माप लेकर उनकी बायोमीट्रिक जानकारी और फिंगरप्रिंट का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आवश्यकता पड़ने पर पुराने रिकॉर्ड से नए साक्ष्यों का मिलान करना है।
घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से होगी पहचान
चोरी, लूट, हत्या और चाकूबाजी जैसे गंभीर अपराधों के घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट का पुलिस उपलब्ध डेटाबेस से मिलान करेगी। इस प्रक्रिया से संदिग्ध व्यक्तियों की सटीक पहचान करने और जांच को तेजी से आगे बढ़ाने में काफी सहायता मिलेगी। पूर्व में दर्ज बायोमीट्रिक डेटा के आधार पर संदिग्धों के बारे में तुरंत जानकारी मिलना संभव हो सकेगा। अपराध की जांच के दौरान कई बार पुलिस को संदिग्ध की पहचान स्थापित करने में समय लगता है। ऐसे में पहले से डिजिटल रूप में संग्रहित बायोमीट्रिक रिकॉर्ड जांच अधिकारियों को नया सुराग देने में बेहद उपयोगी साबित होंगे।
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अलग-अलग अपराधों के बीच संबंध की पड़ताल
विभिन्न स्थानों पर घटित अपराधों में यदि एक ही व्यक्ति के निशान मिलते हैं तो रिकॉर्ड के मिलान से पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि उन घटनाओं के बीच कोई अंतरसंबंध है या नहीं। इससे संभावित आरोपियों की आपराधिक भूमिका स्पष्ट करने और जांच की आगे की दिशा तय करने में आसानी होगी।
बायोमीट्रिक और फिंगरप्रिंट के अलावा अपराधों की जांच में सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, मोबाइल फोन तथा अन्य डिजिटल उपकरणों से मिले साक्ष्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी जांच संबंधित तकनीकी पद्धतियों से की जाती है, जबकि एमसीयू और एनएएफआईएस का प्रयोग विशेष रूप से माप और बायोमीट्रिक डेटा के लिए हो रहा है।
कंट्रोल रूम सेक्टर-6 में शुरू हुई व्यवस्था
पुलिस प्रशासन ने बायोमीट्रिक डेटा संग्रह और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की इस पूरी व्यवस्था को कंट्रोल रूम सेक्टर-6 में शुरू किया है। इस केंद्र के माध्यम से पुलिस पुराने और नए अपराधियों का विस्तृत विवरण डिजिटल प्रारूप में सहेज रही है। आपराधिक मामलों की जांच प्रक्रिया के दौरान जब भी घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट अथवा अन्य भौतिक साक्ष्य मिलेगा, उसे तत्काल इस केंद्रीय डेटाबेस से मिलाया जाएगा। इससे न केवल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बदमाशों की गतिविधियों पर नजर रखने में आसानी होगी, बल्कि विभिन्न मुकदमों की कड़ियों को आपस में जोड़ना भी अधिक सुगम हो जाएगा। आवश्यकतानुसार अन्य साक्ष्यों को भी पड़ताल में शामिल किया जाएगा।