राज्य के नक्सल विरोधी अभियान के पुलिस उप महानिरीक्षक ओपी पाल ने बताया कि शुक्रवार की रात बीजापुर और सुकमा जिले से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कोबरा बटालियन, डीआरजी और एसटीएफ के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। उन्होंने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में बीजापुर जिले के तर्रेम, उसूर और पामेड़ से तथा सुकमा जिले के मिनपा और नरसापुरम से लगभग दो हजार जवान शामिल थे।
पाल ने बताया कि अभी तक मिली जानकारी के अनुसार मुठभेड़ में कोबरा बटालियन का एक जवान, बस्तरिया बटालियन के दो जवानों तथा डीआरजी के दो जवानों (कुल पांच जवानों) की मृत्यु हुई है। इस दौरान 30 जवान घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुठभेड़ में पांच जवानों की शहादत पर दुख व्यक्त किया है।
जवानों को हमले का पहले से अंदेशा था
ऐसा माना जा रहा है कि जवानों को नक्सलियों के हमले का पहले से अंदेशा था, इसलिए नक्सल विरोधी अभियान में दो हजार जवानों को शामिल किया गया था। बीजापुर-सुकमा जिले का सरहदी इलाका जोनागुड़ा नक्सलियों का मुख्य इलाका है। यहां नक्सलियों की पूरी बटालियन और कई प्लाटून हमेशा तैनात रहती हैं। इस पूरे इलाके की कमान महिला नक्सली सुजाता के हाथों में है।
ट्रैक्टर में साथियों के शव ले गए थे नक्सली
पुलिस महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने कहा कि ये मुठभेड़ करीब दो-तीन घंटे चली। पुलिस की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, नक्सली दो ट्रैक्टरों में शवों को ले गए थे।