बलरामपुर जिले की नौ तहसील 200 हल्कों के 124 पटवारी किसानों के रकबे में अवैधानिक रूप से अन्य व्यक्तियों के रकबे में नाम जोड़ने को लेकर 12 पटवारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की अनुशंसा के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जिला मुख्यालय में बैठ गए हैं। इससे पूरे जिले का राजस्व कार्य ठप्प हो गया है। मामले में सरगुजा संभाग के कमिश्नर के द्वारा प्रभारी तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है। पटवारी संघ के द्वारा जांच पर भी सवाल खड़ा करते हुए जांच अधिकारी शशि कुमार चौधरी के अन्यत्र किसी अन्य जिले में स्थानांतरण की भी मांग की है।
जिला पटवारी संघ के पदाधिकारीश धीरेंद्र उर्मलिया, चंचल कुमार मिरी, खिलंती नायक, शैलेष मेहता, हामिद रजा, विनय पांडेय, विमलेश सिंह, विशाल अग्रवाल, कृष्ण कुमार सिंह, नसीम उल हक, धर्मपाल सिंह, आनंद पांडेय, पवन पांडेय, ऋचा यादव, रमेश यादव, संजय सोनी, विजय यादव, अंकित गुप्ता, देवेंद्र विश्वकर्मा, करुणा नाग, साधना सिंह, नियति टोप्पो ने कहा कि गिरदावरी का कार्य 30 सितंबर तक हम लोग के द्वारा किया जाता है।
वहीं, 20 अक्तूबर तक संशोधन होता है। किसानों का पंजीयन समिति एवं तहसीलदार के द्वारा किया जाता है। 30 अक्तूबर तक किसानों का पंजीयन हुआ। वहीं, संशोधन का अधिकार तहसीलदार के पास है। तहसीलदार के मॉड्यूल से संशोधन की कार्यवाही हुई तो इसमें पटवारी दोषी कैसे हैं। जब तहसीलदार के द्वारा संशोधन किया गया तो तहसीलदार के संशोधन की जांच हम नहीं कर सकते हैं, फिर हम लोगों के खिलाफ कार्यवाही की अनुशंसा क्यों की गई।
शशि चौधरी के तबादले की मांग
पटवारी संघ ने कहा कि जिले में विवादित रहे डिप्टी कलेक्टर शशि चौधरी के द्वारा अनावश्यक रूप से पटवारी को प्रताड़ित करने के लिए ऐसा कृत किया गया है। पूर्व में भी उनके द्वारा पटवारियों को प्रताड़ित किया गया था। यहां तक की जहां भी रहे हमेशा विवादित रहे। पटवारी संघ ने एक स्वर में शशि चौधरी के जिले से अन्य स्थानांतरण की मांग की है।
जिला खाद्य अधिकारी की भूमिका की हो जांच
पटवारी संघ ने कहा कि तहसीलदार के मॉड्यूल से जब कोई भी संशोधन होता है तो इसकी जानकारी जिला खाद्य अधिकारी के खाद्य मॉड्यूल में तत्काल प्राप्त होती है। रकबे में अप्रत्याशित वृद्धि की जानकारी खाद्य विभाग को होती है न की पटवारी को। ऐसे में जब उनके द्वारा रकबा संशोधन किया जा रहा था तो जिला खाद्य अधिकारी के द्वारा मौन क्यों धारण किया गया। जिला खाद्य अधिकारी की भूमिका की जांच हो एवं उनके खिलाफ कार्रवाई हो।
पटवारी ने नोटिस के बाद दिया जवाब
पटवारी संघ ने आरोप लगाया कि जांच त्रुटि पूर्ण हुई है। पटवारी ने नोटिस के बाद जवाब दिया। उनके खिलाफ कार्यवाही की अनुशंसा हुई। वहीं, जिस पटवारी ने जवाब नहीं दिया उनके खिलाफ कार्रवाई के अनुशंसा नहीं हुई। जिन संदिग्ध किसानों की सूची बनाई गई, उसमें कई किसानों के पास वैध दस्तावेज हैं। कई किसानों ने धान बिक्री ही नहीं की है, उनका भी नाम सूची में जोड़कर इस गंभीर मुद्दे की जांच को विवादित बनाने का काम जांच समिति द्वारा किया गया है।