आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में फंसे स्टार क्रिकेटर युवराज सिंह को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए युवराज सिंह ने बताया कि एक अप्रैल 2020 को वह सोशल मीडिया पर अपने साथी रोहित शर्मा के साथ लाइव चैट कर रहे थे। लॉकडाउन को लेकर चर्चा के दौरान उन्होंने मजाक में अपने साथी युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव पर एक टिप्पणी की थी। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया और इसके साथ यह संदेश जोड़ा गया कि यह अनुसूचित जाति वर्ग का अपमान है। यह सब एक मजाक का हिस्सा था और इसका मकसद किसी का अपमान करना नहीं था।
इसका स्पष्टीकरण देने के लिए पांच जून को एक बयान भी जारी किया। याची ने बताया कि उन्हें गुरुग्राम पुलिस से भी जून 2020 में फोन आया था और उन्हें बताया गया था कि उनके खिलाफ शिकायत आई है। इसका जवाब उन्होंने भेज दिया, जिससे संतुष्ट होकर मामला समाप्त हो गया। याची को 15 फरवरी को अखबार से यह जानकारी मिली कि हांसी के रजत कलसन की शिकायत पर उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट का मामला दर्ज किया गया है।
याची ने कहा कि यह सब उसे बदनाम करने की साजिश है और ऐसे में एफआईआर रद्द की जाए। साथ ही याचिका के लंबित रहते उन्होंने न्यायालय से अग्रिम जमानत की मांग भी की है। फिलहाल युवराज के लिए सबसे बड़ी राहत हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश लाया है, जिसके चलते इस मामले में पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है। अगली सुनवाई पर सरकार को एफआईआर रद्द करने की अपील और अग्रिम जमानत की मांग पर जवाब देना होगा।