चंडीगढ़। साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित लिटराटी-2020 के तीसरे और अंतिम दिन रविवार को 25 लेखकों और ऑनलाइन दर्शकों ने चर्चा में हिस्सा लिया। यह चर्चा मुख्य रूप से संगीत और कामयाबी पर केंद्रित रही। इसमें युवाओं का करिअर के चक्कर पर अपने रिश्तों के वायदों से दूर होना और इसकी वजह से रिश्तों में बढ़ रहे तनाव पर चर्चा की गई।
पहले चरण की शुरुआत ब्रिटिश मूल के लेखक ऑलिवर क्रास्के और स्वाती भदौरिया के बीच रही। सेशन में ऑलिवर की लिखी पुस्तक द इंडियन सन पर बात हुई। इसमें स्वर्गीय पंडित रवि शंकर के संगीत और जीवन से जुड़े किस्सों को लिखा गया है। ऑलिवर ने बताया कि पंडित रवि शंकर से मिलकर मैंने संगीत को जाना। पहली बार उनसे 1994 में मिलना हुआ। इसके बाद उनके जीवन पर आधारित किताब राम माला को लिखा। मगर हाल ही में उनके गुजर जाने पर उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी इस किताब में प्रकाशित किया है। क्रास्के ने पंडित रवि शंकर के बारे में बताया कि उन्हें हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों का काफी शौक था पहली बार जब उनसे वर्ष 1994 में मिला तो उनकी कलेक्शन में काफी फिल्में देखीं।
युवाओं में बदले रिश्तों के मायने
लेखिका अनुजा चौहान और मंदीप कौर के बीच की चर्चा युवाओं और बदलते रिश्तों पर आधारित रही। अनुजा ने अपनी लेखनी पर बताया कि उन्हें जीवन में बैलेंस पसंद है। ऐसे में मेरी लिखावट में भी ये झलकता है। उन्होंने कहा कि रोमांस की बात करें तो आज चीजें बदल गई है। अब बात करने का तरीका और संवाद के माध्यम बदल गए हैं। पहले लड़की का सरनेम जानने में 20 दिन लगते थे लेकिन आजकल तो सीधा नंबर ही मिल जाता है। आजकल युवाओं के मुद्दे भी बदल गए हैं। अब युवाओं में रिश्तों में वायदों को लेकर डर, करिअर, दोस्ती और पैशन के मुद्दे ज्यादा हावी हैं। हालांकि लोगों में शिक्षा का स्तर बढ़ने से अब रिश्तों में बोझ कुछ कम भी हुआ है।
जीवन जीने की कला सीखने के लिए चाणक्य से लें प्रेरणा
लेखक डॉ. राधाकृष्णन पिल्लई, डॉ. जानकी संतोके और कर्नल डीएस चीमा ने वेदांता और मॉर्डन चाणक्य के अनुसार कामयाबी की परिभाषा पर चर्चा की। डॉ. राधाकृष्णन पिल्लई ने बताया कि कामयाबी के लिए पता होना चाहिए कि हमें करना क्या है और हम किसमें अच्छे हैं। कई वजहें होती हैं कि हम कई बार वो नहीं करते, जिसमें हमारी रुचि है। वक्त के अनुसार चीजें बदली हैं। उन्होंने बताया चाणक्य से बेहतर कोई भी जीवन जीने की प्र्रेक्टिकल कला नहीं सिखा सकता। अब तो मैनेजमेंट में भी चाणक्य को पढ़ाया जा रहा है।