मनीमाजरा। कलाग्राम में राष्ट्रीय शिल्प मेले में बुधवार की शाम एक अनोखे सांस्कृतिक संगम की साक्षी बनी, जब हरियाणवी लोक गायिका विधि देशवाल ने अपनी मधुर आवाज और ठेठ हरियाणवी अंदाज से कलाग्राम में उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया। मंच पर आते ही उन्होंने जिस सहजता, आत्मीयता और गरिमा के साथ गीत प्रस्तुत किए, उसने कार्यक्रम को वास्तविक अर्थों में हरियाणवी नाइट का रूप दे दिया। जैसे ही उन्होंने तेल चमेली चंदन साबुन चाहे लगा लो सेंट, जगत में कोई ना परमानेंट... लोकगीत प्रस्तुत किया तो दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान छा गई।
निधि का संवेदनाओं से भरा गीत मैं सासरिये ना जाऊं मेरी मां... विशेषकर महिलाओं के दिलों को गहराई से छू लिया। इसके बाद मेरा मन लग्या फकीरी में... ने उनकी गायकी ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि हर अंतरे पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। उन्होंने एक के बाद एक कई लोकप्रिय गीत से लोगों को मंत्रमुग्ध्कर दिया।
संस्कृति है तो हम हैं- निधि का स्पष्ट संदेश
कार्यक्रम के दौरान बातचीत में निधि देशवाल ने कहा कि कला और संस्कृति किसी भी समाज की जड़ होती है, इसलिए कलाकारों का दायित्व है कि वे इसे शुद्धता के साथ आगे ले जाएं। उन्होंने कहा, ‘मेरा विश्वास साफ-सुथरे गीतों में है क्योंकि ऐसे गीतों की उम्र लंबी होती है।
रागिनी के सुरों से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध रागिनी गायक राकेश भराणिया की रागिनी से हुई। भराणिया ने देश-विदेश में हरियाणा की मिट्टी की महक बिखेरने वाले कई लोकप्रिय राग प्रस्तुत किए। उनका दमदार अंदाज और साथ बजने वाले लोकवाद्यों, ढोलक, सारंगी और बीन ने पूरे माहौल में पारंपरिक लोक-सुगंध घोल दी।