करिअर और तमाम अन्य जिम्मेदारियां के बीच तनाव का शिकार हो रहे युवाओं के लिए योग वरदान के समान है। इससे एंजाइटी जैसी गंभीर समस्या तो दूर होती ही है साथ ही बौद्धिक विकास भी तेजी से होता है। यह नहीं, याददाश्त मजबूत होने के साथ हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी तेजी से कम होता है।
ये बातें सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजस्थान के विशेषज्ञों ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों पर किए गए शोध के परिणाम से साबित कर दिया है। एंजाइटी के शिकार युवाओं पर महज दो महीने के योग सत्र से चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं।
पीजीआई की ओर से यूटी गेस्ट हाउस में आयोजित योग सम्मेलन के समापन समारोह में बुधवार को सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजस्थान के डिपार्टमेंट ऑफ योगा के डॉ. काशीनाथ मैत्री ने विश्वविद्यालय के छात्रों पर किए गए शोध को प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि इसके लिए चिह्नित छात्र-छात्राओं को दो बराबर वर्गों में बांटा गया। इसमें से एक वर्ग को दो महीने तक लगातार योग कराया गया। वहीं, दूसरे वर्ग में सामान्य प्रक्रियाएं जारी रखी गईं। योग सत्र के बाद दोनों वर्गों में विभिन्न मानकों के आधार पर समस्याओं का स्तर जांचा गया, जिसमें योग करने वाले युवाओं में बेहतर परिणाम सामने आए, जबकि योग न करने वाले वर्ग में शामिल युवाओं की समस्या पहले की तुलना में बढ़ी हुई पाई गई।
लड़के व लड़कियों दोनों पर किया शोध
इस शोध में राजस्थान के साथ ही देश के विभिन्न चार विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया। इसमें ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र शामिल थे। शोध में शामिल छात्रों में 40 प्रतिशत लड़कियां व 60 फीसदी लड़के शामिल थे। वे सभी एंजाइटी के कारण डिप्रेशन व अकेलेपन के शिकार थे। इस वजह से वे नशे की लत की और अग्रसर हो रहे थे। उनसे बात करने पर पता चला कि पढ़ाई के साथ उन पर करिअर को लेकर तनाव हावी है। अपनों से संपर्क कम होने के कारण वे अपनी बातें खुलकर नहीं कह पा रहे हैं। इससे तेजी से एंजाइटी के शिकार हो गए हैं।
इस तरह से कराया योग
शोध में शामिल छात्रों को दो महीने तक विभिन्न आसन और प्राणायाम के साथ मेडिटेशन कराया गया। डॉ. काशीनाथ ने बताया कि उन्हें हफ्ते में तीन दिन योग का सत्र करवाया गया। इसमें अर्ध कटीचक्रासन, त्रिकोणासन जैसे खड़े होकर किए जाने वाले दो मुख्य आसान, दो बैठकर किए जाने वाले आसन, दो लेटकर किए जाने वाले आसन व दो पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसन करवाए गए। वहीं, यह शुरू करने से पहले उन्हें 10 मिनट का वार्मअप कराया गया। उसके बाद प्राणायाम और ध्यान कराया गया। प्रतिदिन 50 से 60 मिनट का सत्र हुआ।
80 से 30 पर आया एंजाइटी
शोध में शामिल लड़के-लड़कियों को 2 महीने तक कराए गए योग के विशेष सत्र के बाद उनका एंजाइटी और अन्य समस्याओं का स्तर जांचा गया। डॉ. काशीनाथ ने बताया कि शोध शुरू करने से पहले उन युवाओं में एंजाइटी का स्टार 70 से 80 प्रतिशत के बीच था, जो योग करने के बाद कम होकर 30 फीसदी पर आ गया। वहीं, उनमें बौद्धिक विकास भी तेजी से हुआ। उनमें ध्यान केंद्रित करने, सोचने की क्षमता, कार्ययोजना बनाने की क्षमता तेजी से विकसित हुई। इसके साथ ही वह सही निर्णय लेने में भी सक्षम पाए गए। सबसे बड़ा परिणाम यह सामने आया कि मानसिक स्थिति मजबूत होने के साथ उनमें हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी काफी हद तक काम हो गया।