पंजाब में 21 सितंबर से दो नवंबर तक पराली जलाए के मामलों में पिछले साल की तुलना में 49 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई। राज्य में 21 सितंबर से 2 नवंबर तक पराली जलाने के 36,755 मामले सामने आए। वहीं 2019 में इस अवधि में ऐसी घटनाओं की संख्या 24,726 थी। एक तरफ शुरुआती लॉकडाउन में प्रकृति ने खुलकर सांस ली तो वहीं सितंबर से नवंबर के बीच ये संतुलन बिगड़ गया और हवा पहले से ज्यादा खराब हो गई।
कृषि कानूनों पर हाहाकार
2020 में कृषि कानूनों के लागू होेने के बाद विरोध में किसान सड़कों पर उतर आए। पहले ट्रेन की पटरियों पर प्रदर्शन किए गए। हल न निकलता देख किसानों ने 25 नवंबर को दिल्ली कूच किया और सिंघू व टिकरी बॉर्डर पर ट्रॉलियों को ही आशियाना बनाकर धरने में जुट गए। वहीं किसान आंदोलन के प्रभाव से कारपोरेट घराने भी नहीं बच पाए। प्रदेश में 1500 से ज्यादा जियो के मोबाइल टावरों पर किसानों गुस्सा उतारा।
हरसिमरत बादल का इस्तीफा, अकाली-भाजपा गठबंधन टूटा
किसान आंदोलन के प्रभाव से राजनीतिक गलियारा भी अछूता नहीं रहा। भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का 24 साल पुराना गठबंधन टूट गया। पहले केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने अपने पद से इस्तीफा दिया फिर अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ दिया। केंद्र में सत्तारूढ़ राजग का गठन 1998 में हुआ था और शरद यादव इसके पहले संयोजक बनाए गए थे। शिअद इसका संस्थापक सदस्य था। भाजपा के सहारे ही प्रकाश सिंह बादल पंजाब में पांच बार सीएम की कुर्सी पर बैठे थे।
किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब की नामचीन हस्तियों ने अवार्ड लौटाए। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा व साहित्यकार सुरजीत पातर ने अपने पुरस्कार वापस किए। भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता पंजाब के प्रसिद्ध शायर डॉ. मोहनजीत, प्रख्यात विचारक डॉ. जसविंदर सिंह व पंजाब के 27 खिलाड़ियों ने किसानों के समर्थन में अपने पुरस्कार लौटाए। इनमें पद्मश्री करतार सिंह पहलवान, ब्रिगेडियर हरचरण सिंह, दविंदर सिंग गरचा, सुरिंदर सोढ़ी, गुनदीप कुमार प्रमुख थे।
भाजपा पर गुस्सा, प्रदेश प्रधान की गाड़ी पर पथराव
प्रदेश में भाजपा के 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर सरकार बनाने के दावे पर भाजपा प्रदेश प्रधान की गाड़ी पर हमला भारी रहा। एक तरफ प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा की गाड़ी पर पथराव किया गया तो वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यक्रमों में किसानों ने तोड़फोड़ कर अपने इरादे साफ कर दिए।
चार साल बाद ईडी ने खोली रणइंदर की फाइल
2020 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रणइंदर की फाइल चार साल बाद खोली गई। विदेश में अघोषित संपत्ति छिपाने के मामले में ईडी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे को चार बार तलब किया और पेशी के लिए बुलाया। रणइंदर सिंह एक बार पेश हुए और बयान दर्ज करवाए।
एसजीपीसी के पब्लिकेशन विभाग की ओर से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों का रिकॉर्ड सही ढंग से नहीं की किया गया था। 2013-14 व 2014-15 के ओपनिंग व क्लोजिंग लेजर में कटिंग की गई है। 2013 से 2016 तक 328 स्वरूप रिकॉर्ड में कम मिले। मानवाधिकार से जुड़ी कुछ संस्थाओं ने सूचना के अधिकार के तहत इसकी जानकारी मांगी थी। एसजीपीसी ने बताया कि 267 स्वरूप लापता हैं। इसके बाद जांच तेलंगाना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज ईशर सिंह की कमेटी को सौंपी गई।
जांच में सामने आया कि 328 स्वरूप लापता हैैं। प्रकाशन विभाग ने छपाई के दौरान स्वरूपों के खराब हुए अंगों को जोड़कर गैर कानूनी ढंग से बिना बिलों के एक बार 61 और एक बार 125 स्वरूप तैयार कर बेचे। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह भी पाया गया कि वर्ष 2015 से 2020 तक के रिकॉर्ड में बिलों और अन्य दस्तावेजों में भी काफी अंतर है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इसकी जांच की। इसमें कई एसजीपीसी कर्मचारी दोषी पाए गए। सिख जत्थेबंदियों ने एसजीपीसी कार्यालय के बाहर धरने भी दिए। इस दौरान खूनी संघर्ष भी हुआ।
धर्मसोत के कारण कैप्टन की किरकिरी
पंजाब के अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार की पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के तहत मिले धन में पंजाब के कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत पर 64 करोड़ रुपये का घोटाला करने के आरोप लगे। मामले में कैप्टन सरकार की काफी किरकिरी हुई। सड़कों से लेकर विधानसभा में खासा बवाल और हंगामा हुआ।
माझा में लॉकडाउन के दौरान जमकर जहरीली शराब बेची गई। नतीजतन इस शराब को पीने से 123 लोगों की जान चली गई। तरनतारन, अमृतसर और बटाला क्षेत्र में जहरीली शराब ने खूब तांडव मचाया। इसके बाद विपक्षी दलों ने खासा हंगामा किया और कैप्टन सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
पैदल ही पलायन को मजबूर हुए मजदूर
पंजाब में लॉकडाउन व कर्फ्यू लगने के बाद मजदूर पैदल ही बिहार और यूपी की तरफ निकल पड़े। करीब 10 लाख लोगों ने पंजाब से पलायन किया। कई लोग परिवारों समेत 2-2 हजार किलोमीटर तक पैदल चलकर घर पहुंचे। इसका असर पंजाब की खेतीबाड़ी के अलावा उद्योग जगत पर भी हुआ।
बीबी जागीर ने तीसरी बार संभाली एसजीपीसी की कमान
बीबी जागीर कौर ने 2020 में तीसरी बार एसजीपीसी अध्यक्ष पद की सेवा संभाली। जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एसजीपीसी-शिअद के रिश्तों को मां-बेटा के रिश्ते के साथ जोड़ नई चर्चा को जन्म दिया।