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Year Ender 2020: चंडीगढ़ में कोरोना ने मचाया कोहराम, पीजीआई में थमी ओपीडी... अंग प्रत्यारोपण जारी रहा

Fri, 25 Dec 2020 04:46 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई चंडीगढ़।
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ऐसा पहली बार होगा जब लोग नए साल के आने से ज्यादा साल 2020 के बीत जाने की खुशी मनाएंगे। साल 2020 कई तरह की दुखद यादें देकर जा है। मार्च में शुरू हुई कोरोना महामारी ने ऐसा कहर मचाया कि यह पूरा साल इस बीमारी से जूझते निकल गया। कई लोगों ने अपनी जान गंवाई तो कई लोग मौत के मुंह से जैसे-तैसे बाहर निकले। इस महामारी ने अर्थव्यवस्था को भी पटरी से उतार दिया। कारोबार चौपट हो गए। 

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कई लोगों को तो अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी। महीनों तक लोग अपने परिजन से नहीं मिल पाए। कोरोना का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। महीनों तक ऑपरेशन व ओपीडी बंद रही। इससे दूसरी गंभीर बीमारियों को परेशानी उठानी पड़ी। कई तो ऐसे भी थे, जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिला और मौत को गले लगाना पड़ा। एक नजर डालते हैं स्वास्थ्य से संबंधित उन घटनाओं और सबक पर, जो साल 2020 के इतिहास में दर्ज हो गई हैं।

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18 मार्च को आया था कोरोना का पहला केस
होली के बाद कोरोना के संदिग्ध मरीजों का आना जारी हो गया था लेकिन चंडीगढ़ में कोरोना का पहला केस 18 मार्च को दर्ज किया गया था। उसके बाद केसों के आने का सिलसिला शुरू हुआ। 24 अप्रैल के बाद बापूधाम शहर का पहला हॉटस्पॉट के रूप में सामने आया।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रशासन को संक्रमण से बचाव के लिए बापूधाम में फोर्स लगानी पड़ी। एक समय ऐसा आया, जब एक दिन में 450 से ज्यादा कोरोना के मरीज मिले लेकिन फिर स्थितियां काबू आने लगीं। शहर में अब तक कोरोना के 19184 मरीज हो चुके हैं, जबकि 312 की हो चुकी है मौत।

कोरोना योद्धाओं ने संभाला मोर्चा

शहर में एक ऐसी महामारी देखी, जिसमें कई लोगों ने अपनों को छूने व अपनाने से इंकार कर दिया। ऐसी कई घटनाएं सामर्ने आईं, जिसमें मानवता तार-तार हो गई। ऐसे समय में डाक्टर, नर्सेज, पैरा-मेडिकल स्टाफ ने मोर्चा संभाला। मरीजों को इलाज दिया। छुट्टियां रद्द कर अस्पतालों में डेरा डाला। कुछ ही समय में अस्पतालों को कोविड हास्पिटल में बदल दिया। समाज ने भी ऐसे लोगों को सिर आंखों पर बैठाया और उन्हें कोरोना योद्धा का नाम दिया।

टल गई सर्जरी और थम गई ओपीडी
पीजीआई, मेडिकल कॉलेज और शहर के अन्य अस्पतालों में रोजाना 14 से 15 हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। कोरोना की वजह से अचानक से ओपीडी को बंद कर दिया गया। इससे मरीजों का इलाज थम गया। जिन मरीजों को सर्जरी के लिए समय दिया गया था, उनकी सर्जरी कब तक होगी, अब तक उनका पता नहीं। हालांकि पीजीआई में इमरजेंसी सर्जरी जारी रहीं। हालांकि इस बीच पीजीआई ने टेलीफोन के माध्यम से मरीजों को परामर्श देना जारी रखा। नवंबर में ओपीडी में 50 मरीजों की स्वीकृति भी दी।

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...लेकिन अंग प्रत्यारोपण का कार्य जारी रहा
कोरोना के कारण संक्रमण से बचाव को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों की ओपीडी बंद कर दी गई लेकिन इस दौरान भी अंगदान और अंग प्रत्यारोपण का क्रम जारी रहा। पीजीआई में लॉकडाउन के दौरान 12 साल के एक बच्चे में हृदय का सफल प्रत्यारोपण किया गया जबकि 11 मरीजों को किडनी लीवर का सफल प्रत्यारोपण कर उन्हें नया जीवन दिया।

शुरू हुआ कोरोना वैक्सीन का ट्रायल

उतार-चढ़ाव से भरे इस साल में कोरोना के बचाव के लिए पीजीआई में ऑक्सफोर्ड की कोविडशिल्ड वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया गया। जो सफलतापूर्वक दो चरण पूरा कर चुका है। इस ट्रायल में 149 लोगों को वैक्सीन की दो खुराक दी गई है। अगले छह महीने तक उन लोगों का फॉलोअप किया जाएगा। फॉलोअप के परिणाम स्वरूप यह तय होगा कि वैक्सीन का ट्रायल कितना सफल रहा।

आयुर्वेद की ओर बड़ा झुकाव
इस महामारी के साथ स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव आया। ओपीडी बंद होने से जहां दुकानों में मंदी छाई रही, वहीं सैनिटाइजर, मास्क, ग्लव्स, पीपीई किट के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की बिक्री बढ़ी। इसके साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोगों का आयुर्वेद की ओर झुकाव बढ़ा।

बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों के मसीहा ने अलविदा कहा
कोरोना महामारी के बीच कैंसर से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बीएस चवन इस साल दुनिया को अलविदा कह गए। तीन दिसंबर की रात उनका निधन हो गया। गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद वे कोरोना काल में ड्यूटी देते रहे। उन्होंने बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना सिखाया था।
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स्वास्थ्य विभाग को मिला नया निदेशक

शहर को कोरोना काल में ही नया स्वास्थ्य निदेशक भी मिला है। पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर जी दीवान के सेवानिवृत्त होने पर डॉक्टर अमनदीप कौर कंग ने एक अक्तूबर से स्वास्थ्य निदेशक की जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सफल निर्वाह करते हुए कोरोना से बचाव के लिए कई नई रणनीति अपनाई जो सफल साबित हो रही है।

कोरोना टीकाकरण के लिए जारी है पंजीकरण
कोरोना से बचाव के लिए सरकार की तरफ से होने वाले टीकाकरण अभियान के लिए भी शहर में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां जोरों पर है। स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 16 हजार से ज्यादा फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों का पंजीकरण भारत सरकार के पोर्टल पर कर दिया है। कोरोना महामारी के इस दौर में बचाव के लिए नए साल से टीकाकरण होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
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