आरक्षण और सात सूत्रीय मांगों को लेकर 29 जनवरी से आंदोलन कर रहे जाटों ने अब मांगें पूरी होने में देरी के चलते कड़ा रुख अपना लिया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के गुट और सरकार के बीच गतिरोध और बढ़ा है। मलिक गुट के तेवर तीखे होने के कारण सरकार अब तक के घटनाक्रम की समीक्षा में जुट गई है।
वहीं, मलिक गुट ने साफ कर दिया है कि सरकार और भाजपा नेताओं की ओर से जाट आंदोलन व आरक्षण को लेकर की जा रही बयानबाजी जब तक बंद नहीं होगी, तब तक वे दूसरे दौर की वार्ता के लिए नहीं आएंगे। जाटों के तेवरों को देखते हुए सरकार अब पांच सदस्यीय समिति के बजाय खुद वार्ता के लिए दोबारा मलिक गुट को प्रस्ताव भेज सकती है।
शुक्रवार को रोहतक के जसिया में जाट आंदोलनकारियों की चालीस सदस्यीय कोर कमेटी आंदोलन को लेकर आगामी रणनीति बनाएगी। इसका खुलासा 19 फरवरी को बलिदान दिवस पर किया जाएगा। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक बैठक की अध्यक्षता करेंगे। उनकी मौजूदगी में सभी मुद्दों पर बातचीत होगी और सरकार के रुख की समीक्षा कर आंदोलन के स्वरूप को लेकर निर्णय लिया जाएगा। इसमें सभी कमेटी सदस्यों के सुझाव भी लिए जाएंगे।