2009 में पहली बार अनारक्षित हुई बरोदा सीट पर लगातार कांग्रेस के उम्मीदवार श्रीकृष्ण हुड्डा ने तीन बार जीत हासिल की थी, इससे पहले ये हलका इनेलो का गढ़ माना जाता था। 76 साल के श्रीकृष्ण हुड्डा मूलत: किलोई विधानसभा क्षेत्र के खिड़वाली गांव के थे। वह 1987 में पहली बार किलोई हलके से विधायक बने।
किलोई से ही वह दूसरी बार 1996 और तीसरी बार 2005 में विधायक निर्वाचित हुए। 2005 में जब भूपेंद्र हुड्डा पहली बार सीएम बने, तब श्रीकृष्ण हुड्डा ने किलोई सीट से इस्तीफा दे दिया और उसके बाद इस सीट से हुड्डा चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। हुड्डा ने किलोई सीट के त्याग का श्रीकृष्ण हुड्डा को शानदार राजनीतिक इनाम दिया।
अपना अटूट गढ़ माने जाने वाले गोहाना के बरोदा हलके से हुड्डा ने लगातार 3 बार श्रीकृष्ण हुड्डा को विधानसभा में प्रवेश दिलवाया। बरोदा विधानसभा जाटलैंड मानी जाती है। इस विधानसभा में कुल 1 लाख 78 हजार 250 कुल मतदाता हैं, जिनमें लगभग जाट 90 से 95 हजार, ब्राह्मण 20 हजार, ओबीसी 30 हजार, एससी-एसटी 18 हजार व अन्य 10 हजार मतदाता हैं।