दंगल गर्ल बबीता फौगाट की ममेरी बहन रितिका स्टेट चैंपियनशिप में फाइनल मुकाबला सिर्फ एक अंक से अंतर से हार गई थी। इस हार से वह इतनी बुरी तरह टूट गई कि अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली। वह 53 किलोग्राम भारवर्ग में खेल रहीं थीं। इससे पहले वह करीब चार दफा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले चुकीं थीं। उधर अचानक हुई इस घटना से पूरा परिवार सदमे में हैं।
स्कूल में रहा अवकाश, एकेडमी में भी नहीं हुई ट्रेनिंग
इस घटना के बाद महाबीर फौगाट द्वारा संचालित स्कूल में अवकाश घोषित कर दिया गया। साथ ही स्कूल में संचालित कुश्ती एकेडमी में भी खिलाड़ियों की ट्रेनिंग नहीं हुई। यहां एकेडमी में करीब 50 खिलाड़ियों को सुबह-शाम ट्रेनिंग दी जाती है।
मनोचिकित्सक की राय
जीवन में असफलता ही सफलता की राह दिखाती है। असफलता का मतलब सीखने का प्रथम प्रयास है। हार को पचाने की सहनशीलता होनी चाहिए। जीवन में हार नहीं माननी चाहिए। कोच आदि को भी चाहिए कि वे खिलाड़ियों की समय- समय पर काउंसिलिंग करें। जीवन में अवसर आते रहते हैं। हार मिलने पर मनोबल नहीं तोड़ना चाहिए। जीवन को नहीं गंवाना चाहिए। हार से सीखने की जरूरत है। खेल में हार खिलाड़ी को कुछ नया सिखाती है। गलतियों को दूर करने का प्रयास करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
-घनश्याम, शिक्षक प्रशिक्षक।
रितिका फाइनल मुकाबला सिर्फ एक अंक से अंतर से हारीं थीं। वह 53 किलोग्राम भारवर्ग में खेल रहीं थीं। - दिलबाग, इंचार्ज, झोझूकलां