देश में सबसे अधिक ग्रीन कवर्ड एरिया वाले सिटी ब्यूटीफुल की हवा भी प्रदूषित हो गई है। चार साल के भीतर प्रदूषित हवा का स्तर करीब दो गुना बढ़ गया है। नाइट्रोजन आक्साइड का ट्रेंड भी लगातार बढ़ रहा है।
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शुद्ध हवा नहीं मिलने से एलर्जी और सास की बीमारियां बढ़ रही है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, एयर पॉल्यूशन से हर साल 7 मिलियन लोग मरते हैं। इनमें आधे आउटडोर पॉल्यूशन से मरते हैं तो आधे इनडोर पॉल्यूशन से।
पीजीआई के इन्वायरमेंट से जुड़े एक्सपर्ट मानते हैं कि चंडीगढ़ के आसपास एरिया में इनडोर पॉल्यूशन की मात्रा ज्यादा है। इसका असर भी चंडीगढ़ की आबोहवा में पड़ रहा है। व्हीकल तो बढ़ ही रहे हैं।
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इंडस्ट्रियल एरिया और कैंबवाला सबसे ज्यादा प्रदूषित
पॉल्यूशन डिपार्टमेंट की ओर से चंडीगढ़ में सेक्टर-17, इंडस्ट्रियल एरिया, पंजाब इंजीनियरिंग कालेज, गवर्नमेंट कालेज फॉर गर्ल्स और कैंबवाला विलेज में प्रदूषण मापने के लिए मीटर लगाए हैं। इंडस्ट्रियल एरिया सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका है।
यहां पर लगे पैरामीटर बताते हैं कि हवा में रेस्प्राइरेबल सस्पेंडेड पार्टीकुलेट मैटर (आरएसपीएम) की मात्रा 125 माइकोग्राम पर क्यूबिक मेटर पाया गया है, जबकि नाइट्रोजन (एनओएक्स) की मात्रा 35 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मेटर मिला है। इसी तरह से कैंबवाला की हवा भी बिगड़ी हुई है।
यहां पर आरएसपीएम की मात्रा 101 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मेटर मिली है। इस तरह से नाइट्रोजन की मात्रा 24 माइक्रोग्राम पाई गई है। विभाग के मुताबिक चंडीगढ़ में आरएसपीएम की लिमिट 60 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक बनाया गया है, जबकि नाइट्रोजन आक्साइड की लिमिट 40 माइक्रोग्राम बनाई गई है।
एक्सपर्ट बोले, खतरे की घंटी
पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के असिस्टेंट प्रोफेसर व इन्वायरमेंट एक्सपर्ट डा. रविंद्रा खैवाल ने बताया कि हवा प्रदूषित होने से क्रोनिक आब्सट्रक्टिव प्लोमनेरी डिजीज (फेफड़े संबंधी रोग) बढ़ जाएंगे। पिछले साल इंटरनेशनल एजेंसी फार रिसर्च ऑन कैंसर में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के मुताबिक डीजल के पार्टिकल से कैंसर होने की आशंका रहती है।
चंडीगढ़ में व्हीकल की संख्या सबसे ज्यादा है, इसलिए ऑटो इंडस्टी को इस बारे में जरूर विचार करना चाहिए कि वे ऐसे इंजन प्रमोट करें, जिसमें फिल्टर एडजास्ट की व्यवस्था हो। इससे डीजल के प्रयोग में जो पार्टिकल निकले वे हानिकारक न हो। पीयूसी पर सख्ती बरतनी चाहिए। 15 साल बाद पुराने वाहनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
ये हैं एरिया वाइज प्रदूषण की मात्रा
सेक्टर-17 का ये है हाल साल------आरएसपीएम------एनओएक्स 2010---------86-------------19 2011---------87------------18 2012---------100-----------21 2013----------94-----------28 नोट : आरएसपीएम की लिमिट 60 व एनओएक्स की 40 है
इंडस्ट्रियल एरिया का ये है हाल साल----------आरएसपीएम---------एनओएक्स 2010-------------122---------------20 2011-------------137---------------20 2012-------------131---------------23 2013-------------125----------------35
ये है कुछ अन्य क्षेत्रों में प्रदूषण का लेवल
पंजाब इंजीनियरिंग कालेज का हाल साल आरएसपीएम एनओएक्स 2010 77 13 2011 91 14 2012 97 18 2013 88 27
गर्वमेंट गर्ल्स कालेज व इमटेक का हाल साल--------आरएसपीएम----एनओएक्स 2010-----------95----------12 2011-----------90----------14 2012----------102----------18 2013-----------95-----------28
कैंबवाला विलेज का हाल साल--------आरएसपीएम---------एनओएक्स 2010-----------83---------------11 2011----------103---------------13 2012----------119---------------17 2011----------101---------------24
पॉल्यूशन बढ़ने के कारण
डीजल वाहनों की संख्या बढ़नाअक्सर आने वाली धूल भरी आंधीविदेशी पौधों का परागण भी काफी हद तकचंडीगढ़ के आसपास इलाके में खेतों को जलानाट्राइसिटी में कूड़े के ढेर पर आग लगानाचंडीगढ़ के आसपास डिस्ट्रिक में चूल्हे पर खाना बनाना
पब्लिक ट्रांसपोट को बढ़ावा देना होगाज्यादा पुराने वाहनों को शहर से बाहर करना होगाजब जरूरत पड़े, तभी प्राइवेट व्हीकल का प्रयोग करेंलाइट प्वाइंट पर वाहन को बंद कर देंगाड़ियों का पॉल्यूशन जरूर चेक करना चाहिएपत्तों को नहीं जलाना चाहिए