चंडीगढ़ नगर निगम में वर्षों से कोटेशन का खेल चल रहा है। पिछले दो महीने में ही दो करोड़ रुपये के काम कोटेशन पर हो गए हैं। इसमें कई काम ऐसे हैं, जो गैर-इमरजेंसी हैं लेकिन निगम के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने वह काम कोटेशन पर कराए हैं। इसको लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने फरवरी और मार्च माह में कुल 129 काम कोटेशन पर कराए हैं, जिस पर कुल दो करोड़ 35 हजार 898 रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें से कई गैर-इमरजेंसी कार्य हैं। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार सीपीडब्ल्यूडी मैनुअल के तहत 10 लाख रुपये तक के कार्य कोटेशन पर किए जा सकते हैं। निगम इस लिमिट का पूरा फायदा उठाता है और फरवरी माह में नौ लाख 94 हजार तक के कार्य कोटेशन पर कराए हैं।
स्पॉट कोटेशन के लिए न तो टेंडर और न ही अखबार में विज्ञापन देने की जरूरत होती है। किसी भी इमरजेंसी कार्य के लिए तीन ठेकेदारों से रेट मंगवाता है। जो भी सबसे कम कोट करता है, उसे काम आवंटित कर दिया जाता है। इसी को लेकर शिकायत आती है कि अधिकारी अपने चहेते ठेकेदारों को ही कोटेशन पर कार्य देते हैं।
44 हजार 500 रुपये में बोलेरो गाड़ी के इंजन की सर्विस, 1.15 लाख में रिपेयर
कोटेशन का एक नुकसान यह भी होता है कि टेंडर में कोई कार्य कराया जाता है तो उस पर ठेकेदार की तरफ से डिस्काउंट दिया जाता है, जो सामान्यत 2 फीसदी से लेकर 50 फीसदी तक होता है, लेकिन कोटेशन में कोई डिस्काउंट नहीं होता, बल्कि हमेशा आरोप लगते हैं कि ये महंगे दामों पर दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए निगम ने फरवरी माह में एक सरकारी बोलेरो गाड़ी के इंजन की सर्विस कराई है, जिसका खर्च 44 हजार 500 रुपये बताया गया है, जबकि मार्केट में सामान्य तौर पर ये सर्विस एजेंसी पर अधिकतम आठ से 10 हजार रुपये में हो जाती है। इसके अलावा निगम ने मार्च महीने में एक सरकारी टिप्पर के रिपेयर पर करीब एक लाख 15 हजार रुपये खर्चे हैं। निगम ने कोटेशन पर ही कई सरकारी कार्यक्रम किए हैं और लाखों रुपये खर्चे हैं।
फरवरी में औसतन रोजाना पांच लाख 10 हजार रुपये के काम कोटेशन पर हुए
नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने फरवरी माह में कोटेशन पर कुल एक करोड़ दो लाख एक हजार 473 रुपये के 65 कार्य कराए हैं। औसत निकाला जाए तो निगम ने हर रोज पांच लाख 10 हजार रुपये के काम कोटेशन पर कराए हैं। निगम ने सी एंड डी वेस्ट के लिए टेंपरेरी कलेक्शन सेंटर का निर्माण नौ लाख 94 हजार 618 रुपये में कराया है। इसके अलावा हाल ही में सेक्टर-48 में उद्घाटन हुए वेस्ट टू वंडर पार्क में स्क्रैप मेटल पार्ट्स से जो रोबोट बनाए गए हैं, उस पर पांच लाख 90 हजार रुपये खर्च किए गए हैं। ये कार्य भी निगम ने कोटेशन पर कराया है। इसके अलावा भी कई पार्कों में मरम्मत, पेंट आदि के लाखों का कार्य कोटेशन पर हुआ है।
आयुक्त आनिंदिता मित्रा की सख्ती के बाद भी मार्च में कोटेशन पर हो गए करीब एक करोड़ के कार्य
नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा की सख्ती के बावजूद मार्च महीने में करीब एक करोड़ रुपये का कार्य निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने कोटेशन पर कर दिया है। इसमें ज्यादातर कार्य पब्लिक हेल्थ से जुड़े हैं, लेकिन कई ऐसे कार्य भी हैं जो गैर-इमरजेंसी की श्रेणी में आते हैं। निगम ने कोटेशन पर एरोबिक कंपोस्टिंग गड्ढों की मरम्मत और पेंट का कार्य कराया है, जिस पर 5 लाख 58 हजार 906 रुपये, सुखना लेक के टॉयलेट का मरम्मत कार्य कराया है, जिस पर पांच लाख 87 हजार 283 रुपये खर्च किए गए हैं। ये हालत तब है जब निगम आयुक्त ने सख्त आदेश दिए हैं कि सिर्फ अति इमरजेंसी के कार्य को ही कोटेशन पर किया जाए।
ऐसे काम भी कोटेशन पर हुए
- सुखना लेक पर मौजूद टॉयलेट के मरम्मत का कार्य (राशि - 5 लाख 87 हजार 283 रुपये)
- सेक्टर-39 ए और बी के ग्रीन बेल्ट के रिपेयर और पेंट का काम (राशि - 3 लाख 73 हजार 464 रुपये)
- सेक्टर-48 के ओपन एयर थिएटर के मरम्मत का कार्य (राशि - दो लाख 71 हजार रुपये)
- सी एंड डी वेस्ट के लिए टेंपरेरी कलेक्शन सेंटर का निर्माण (राशि - 9 लाख 94 हजार 618 रुपये)
- मनीमाजरा के शनि मंदिर के पास टी-प्वाइंट सड़क को चौड़ा करने का काम (राशि - एक लाख 82 हजार 900 रुपये)
- मनीमाजरा के सब-ऑफिस के मरम्मत का कार्य (राशि - दो लाख 57 हजार 213 रुपये)
- सेक्टर-24 स्थित जज के घर में टीटी पानी का कनेक्शन देने का कार्य (राशि - 57 हजार 285 रुपये)
- सेक्टर-48 के वेस्ट टू वंडर पार्क में स्क्रैप मेटल से बनाए गए रोबोट (राशि- 5 लाख 90 हजार रुपये)
- एरोबिक कंपोस्टिंग गड्ढों की मरम्मत और पेंट का कार्य (राशि - 5 लाख 58 हजार 906 रुपये)
- एक टाटा टिप्पर के रिपेयर का कार्य (राशि - एक लाख 14 हजार 872 रुपये)
- बोलेरो गाड़ी के इंजन की सर्विस (राशि - 44 हजार 500 रुपये)
कोटेशन पर सिर्फ इमरजेंसी कार्यों को ही मंजूरी दी जाती है। जो भी काम कराए गए हैं, उसकी जस्टीफिकेशन है। बिना इमरजेंसी वाले कार्यों की मंजूरी नहीं दी जाती है।
- आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
कोटेशन पर हो रहे कामों को लेकर हमने पहले भी सवाल उठाए थे। कोटेशन सिर्फ इमरजेंसी कार्यों के लिए ही होने चाहिए, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। मेरा मानना है कि पांच लाख से ज्यादा का कोई भी काम कोटेशन पर नहीं होना चाहिए।
- योगेश ढींगरा, आप पार्षद