लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं, मैंने उस हाल में जीने की कसम खाई है...यह लाइनें फिट बैठती हैं इस बहादुर मिला अंजू पर। क्योंकि जिस बीमारी में लोग जीने की आस तक छोड़ देते हैं, उसमें अंजू ने न केवल खुद को उबारा, बल्कि 10 लोगों को रोजगार भी दिया। अंजू का कहना है कि उन्होंने सुना था कि जब किसी कोई लाइन छोटी करनी हो तो उसके साथ एक बड़ी लाइन खींच दो।
मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी गंभीर बीमारी को हराने के लिए अंजू ने भी कुछ ऐसा ही किया। शारीरिक रूप से 60 फीसदी अक्षम हो चुकीं अंजू पिछले 19 साल से इस बीमारी से जूझ रही हैं लेकिन जज्बा और हौसला ऐसा है कि अब वह हालात से हार चुके लोगों की काउंसलिंग कर उन्हें जीने की राह दिखा रही हैं।
मदद लेने की बजाय करती हैं समाजसेवा
अंजू बताती हैं कि उनकी शादी को 20 साल हो गए हैं। शादी के एक साल बाद ही वे इस बीमारी से पीड़ित हो गईं। एक बार तो लगा कि जिंदगी जैसे खत्म हो गई लेकिन फिर सोचा बेड पर पड़े-पड़े बोझ बनने से अच्छा है कि कुछ किया जाए। बस इसी सोच को लेकर अंजू ने एक विज्ञापन एजेंसी खोल ली।
अब उनके अधीन 10 लोग काम कर रहे हैं। यही नहीं वह समाज सेवा में भी पीछे नहीं हटतीं। वह एम्स में दाखिल और जिंदगी की जंग हार चुके लोगों की काउंसलिंग करती हैं और किसी से कोई चार्ज नहीं लेतीं। टैगोर थियेटर में भी कई बार उन्हें काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है।