बदलते वक्त के साथ गृहिणी के मायने भी बदल गए हैं। अब वह सिर्फ चूल्हे चौके तक सीमित नहीं है बल्कि हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। कोई भी जिम्मेदारी हो, वह कंधे से कंधा मिलाकर डटी रहती हैं। राष्ट्रीय गृहिणी दिवस पर मिलिए ऐसी ही कुछ गृहिणियों से जो दोहरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
एक इंसान की कमाई से घर चलाना नामुमकिन
घर से दफ्तर और दफ्तर से घर के बीच ही जिंदगी बीत रही है। सुबह उठकर घर का काम, फिर ऑफिस। अपने लिए तो वक्त ही नहीं मिलता। दो बेटे हैं, अब बच्चे बड़े हो गए हैं तो कुछ राहत है। इतनी महंगाई में एक इंसान की कमाई से घर चलाना नामुमकिन है।
- दीपिका, मेडिकल लैब टेक्नीशियन
खुद फिट रहेंगे तो परिवार को संभाल पाएंगे
घर पर पति और 13 साल का बेटा है। सुबह पांच बजे उठकर एक्सरसाइज करती हूं। घर का कामकाज निपटाकर अदालत आती हूं। चार बजे आकर फिर घर का काम, बच्चे को पढ़ाना, पौधों को पानी देना, रात का खाना बनाकर सैर करने तक सोने का समय हो जाता है। अपने को फिट रखने के लिए थोड़ा समय खुद के लिए निकालना जरूरी है। तभी हम परिवार को संभाल पाएंगे।
- गीतांजलि, वकील
खुद के लिए समय तो निकालना पड़ता है
2 बेटे हैं, एक 8 और एक 3 साल का। पति चंडीगढ़ पुलिस में हैं। खुद के लिए समय निकालना पड़ता है। सुबह जूस पीकर घर से निकलती हूं, कोर्ट में लंच करती हूं। शाम को घर जाकर बच्चों को दूध और खुद चाय-बिस्कुट लेती हूं। बच्चों को पढ़ाकर फिर रात का खाना बनाती हूं। कुछ देर बच्चों के साथ सैर करती हूं। अगर अपने लिए इतना समय भी निकाल लिया जाए तो काफी है।
- सुमन, नायब कोर्ट
एक्सरसाइज जरूर करती हूं
घर पर पति और 7 साल का बेटा है। कई बार तो छुट्टी वाले दिन भी ड्यूटी पर आना पड़ता है। इसके बावजूद मार्निंग वॉक और एक्सरसाइज के लिए समय जरूर निकालती हूं, इससे जो एनर्जी मिलती है उससे दो घंटे वाला काम एक घंटे में हो जाता है।
- सीमा, लेडी कांस्टेबल
घर और जॉब के बीच मैनेज करना पड़ता है
सुबह साढ़े चार उठकर कोशिश करती हूं कि एक्सरसाइज से दिन की शुरुआत करूं। कई बार हो पाता है, कई बार नहीं, लेकिन वही समय अपना होता है। बाकी दिन तो घर और जॉब के बीच मैनेज करना पड़ता है। सास बहुत मददगार हैं, दो बेटियां और एक बेटा है।
- मनीषा अरोड़ा, डायटीशियन, जीएमएसएच
परिवार की जिम्मेदारी में खुद को भूल जाती हूं
तीन बेटियां हैं, पति को गुजरे दस साल हो गए। नौ हजार रुपये मिलते हैं, सुबह उठकर सारा घर का काम करके यहां आ जाती हूं। फिर रात को घर जाकर बच्चों को खाना बनाकर खिलाने में ही रात हो जाती है। बच्चों की जिम्मेदारी ही निभ जाए, यही बहुत है। अपने लिए समय निकालना तो मुश्किल है। कई बार तो परिवार की जिम्मेदारी निभाते-निभाते खुद को भूल जाती हूं।
- सुषमा, पार्किंग अटेंडेंट
डाइट चार्ट भी करें फॉलो
जीएमएसएच की डायटीशियन मनीषा अरोड़ा का कहना है कि महिलाएं यदि खुद स्वस्थ होंगी तभी परिवार की देखभाल कर पाएंगी। शाकाहारी महिलाओं के लिए आंवला, अमरूद, केला, चुकंदर, पालक, साग, ब्रॉकली, मशरूम का उपयोग बेहतर है। मेवे में खजूर, खुबानी, अनार और सबसे ज्यादा किशमिश आयरन से भरपूर है। मांसाहारी हैं तो रेड मीट, मछली का सेवन भी कर सकती हैं। कैल्शियम के लिए गेहूं, बाजरा, रागी का आटा, नारियल, शकरकंदी, दूध, पनीर, दही, सोयाबीन, संतरा ले सकती हैं। ताजा फल जरूर खाएं, पानी खूब पिएं। सर्दी में तो पंजीरी, कम चीनी वाले तिल के लड्डू भी साथ रख सकते हैं, जैसे समय मिले, उन्हें खा लें।