फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

#KabTakNirbhaya: हैवानियत पर गुस्साईं महिलाएं बोलीं- एक माह में होना चाहिए सजा का फैसला

Sun, 01 Dec 2019 08:44 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना/जालंधर/पटियाला (पंजाब)
विज्ञापन
पूर्णिमा बेरी, कर्मजी कौर, समाज सेविका पूजा पराशर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

बहुत हो चुका है अब, दरिंदे कब तक महिलाओं को शिकार बनाते रहेंगे। अब तो ऑन स्पॉट इंसाफ चाहिए, सजा भी सख्त होनी चाहिए और वह भी एक माह में। सजा में देरी से अपराधियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। 2012 के निर्भया कांड के बाद भी देश आज उसी चौहारे पर खड़ा है, जहां सात साल पहला था, बदला क्या है ?

विज्ञापन


भारत की अदालतों में तारीख पर तारीख मिलती है। तब तक शिकायतकर्ता टूट जाता है, अदालत व कोर्ट कचहरी के चक्कर से खुद ही परेशान हो जाता है। वहशी दरिंदों को अब ऑन द स्पॉट सजा मिलनी चाहिए। एक तरफ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का अभियान चल रहा है और दूसरी तरफ ऐसी घटनाओं से लड़कियों व उनके अभिभावकों में दहशत फैल रही है। पूजा पराशर, समाज सेविका 

हम अमेरिका, कनाडा और यूके का मुकाबला करने जा रहे हैं लेकिन ऐसी घटनाएं देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि को खराब कर रही हैं। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह अगर अनुच्छेद 370 खत्म कर सकते हैं तो दुष्कर्म पर एक माह में फांसी की सजा को लागू करना कोई मुश्किल काम नहीं है। चैरी बहल, आईलेट्स ट्रेनर व लेक्चरर 
विज्ञापन


एक तरफ महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य जोर शोर से चल रहा है। महिलाओं को पुरुषों के बराबर सम्मान देने की बात चल रही है तो दूसरी तरफ महिलाओं के साथ दरिंदगी की जा रही है। अब तो बहुत हो चुका, बर्दाश्त भी नहीं होता। डॉ. जैसमिन दहिया, पंजाब मेडिकल काउंसिल की सदस्य 
 

जिसके साथ दुष्कर्म हुआ हो, वह लड़की तो उम्र भर दिमागी रूप से खड़ी नहीं हो सकती। हैवानियत का शिकार बनीं लड़कियां सारी उम्र जख्म सहती हैं। ऐसे लोगों को तो मौत की सजा बीच चौराहे मिलनी चाहिए ताकि आगे से कोई भी घिनौनी हरकत करने से पहले लाख बार सोचे। अब वक्त आ चुका है, सरकार को कठोर फैसले लेने चाहिए। डॉ. कर्मजीत कौर, पूर्व डीपीआई (कालेजेस)   

महिलाएं तो प्राचीन काल से सशक्त रही हैं लेकिन इस दौर में महिलाओं के साथ हो रही दर्दनाक घटनाओं से दिल कांप उठता है। आजकल की लड़कियां तो नाइट ड्यूटी करती हैं। मेट्रो सिटी में तो रात भर कार्यालय में कार्य करती हैं, उनकी हिफाजत करना सरकार का फर्ज है। सरकार जब तक सख्त सजा का प्रावधान नहीं लाएगी, ऐसी घटनाएं होती ही रहेंगी। सुनीता रिंकू, कांग्रेसी पार्षद 

ऐसे लोग कुंठित होते हैं। सरकार को चाहिए कि रेप केस में कड़ी सजा तय करे। इंसाफ भी तय समय में मिलना चाहिए। ऐसी घटनाओं से महिलाओं का मनोबल गिरता है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। डॉ. जसबीर कौर ऋषि, डीन, डीएवी यूनिवर्सिटी 
 
दुख होता है कि आज भी समाज में वहशी लोग जिंदा है। निर्भया कांड के बाद जिस तरह से देश में गुस्सा था, वह गुस्सा आज फिर पैदा हो रहा है। भारत फिर शर्मिंदा है। उस बच्ची पर क्या बीती होगी, यह सोचकर दिल में टीस उठती है। पूर्णिमा बेरी, एमडी, लीडर वॉल्व एंड कॉक्स।

दर्द और रोष केवल भारत में नहीं कनाडा में भी है। तमाम भारतीय मूल के लोगों में तेलंगाना की घटना को लेकर बेहद रोष है। कब भारत में महिलाओं की सुरक्षा यकीनी होगी, अभी तो अंधेरा ही नजर आ रहा है। नवजोत कौर ढिल्लों, वरिष्ठ पत्रकार, कनाडा।  

एक तरफ भारत में लड़कियों का पूजन होता है, दूसरी तरफ दरिंदे उसको नोचते हैं। यह सब ढीली कानूनी प्रक्रिया का नतीजा है, जब तक इंसाफ मौके पर नहीं मिलेगा, कुछ भी नहीं होगा। लड़कियां कोर्ट में जाती है और परेशान हो जाती है। यही वजह है कि काफी शिकायतें तो ऑन रिकॉर्ड भी नहीं आती। अरुणा अरोड़ा, कांग्रेस पार्षद 

लुधियानाः दुष्कर्म करने वालों को फंदे पर लटकाएं, तभी ऐसे अपराधों पर लगेगी लगाम

तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में वेटनरी डॉक्टर से सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर देश भर में आक्रोश है। इस मामले के बाद महिलाओं में खासकर काफी आक्रोश पाया जा रहा है। महिलाओं की माने तो जब भी कोई इस तरह का मामला सामने आता है, तो हर कोई बयानबाजी के लिए बाहर निकल आते है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए कोई पुख्ता काम नहीं हो रहा है। 

एक तरफ हम देश की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन तक पहुंचाने के सपने देख रहे है, तो दूसरी तरफ उसी देश में एक महिला डॉक्टर को दुष्कर्म कर जिंदा जला दिया जाता है। यह पहला मामला नहीं है, निर्भया से लेकर कई मामले हो चुके हैं। महिलाओं के खिलाफ दरिंदगी के मामले कम नहीं हो रहे हैं। अब समय आ गया है कि ऐसे दरिंदों को बीच चौराहे सजा दी जाए। डॉ. तवलीन कौर, स्टूडेंट

एक तरफ सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पढ़ी लिखी बेटियों के साथ दिन दिहाड़े ये सब हो रहा है। महिलाओं के साथ दरिंदगी करने वालों के खिलाफ अब कुछ ऐसे कदम उठाने होंगे, जो सबक का काम करें। किरण सूद, कारोबार 

प्रशासन व पुलिस को महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। सरकार की ओर से कानून तो बना दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया जाता। संगीता भंडारी, प्रधान, अहसास संस्था।

गुरुग्राम और बंगलुरू जैसी आईटी सिटी में देर रात तक ऑफिस खुले रहते हैं। जहां लड़कियां टैक्सी और ऑटो के माध्यम से आती जाती है। ज्यादातर ऑटो व टैक्सी चालकों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता। सरकार को चाहिए कि इनकी रजिस्ट्रेशन को यकीनी बनाए। ललिता जैन, एडवोकेट 

सरकार को जल्द ही कुछ करना चाहिए, वरना आने वाले समय में लड़कियों का घर से निकलना भी मुश्किल हो जाएगा। दुष्कर्मी के लिए सिर्फ एक ही सजा होनी चाहिए और वो भी मौत की। रीटा चोपड़ा, फाउंडर, विश्वकर्मा बाल विद्या केंद्र  

एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि यह नया भारत है। आज के नए भारत में ऐसे कलंकित काम हो रहे है। जिससे शर्म महसूस होती है। ऐसे हालात पैदा हो रहे है कि लड़कियों का घर से अकेला निकलना खतरे से खाली नहीं होगा। तनु भाटिया। 

पटियालाः फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले मामला, ताकि जल्द से जल्द मिले इंसाफ

तेलंगाना में वेटनरी डॉक्टर से सामूहिक दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या कर जलाने के आरोपी दरिंदों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए और यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलना चाहिए। जिससे पीड़िता व उसके परिवार को जल्द से जल्द इंसाफ मिल सके। यह कहना है पटियाला की प्रतिष्ठित महिलाओं का।

किसी को भी कानून को अपने हाथों में लेने का अधिकार नहीं है। तेलंगाना में वेटरिनरी डॉक्टर के साथ जो हुआ, वह एक जघन्य अपराध है, आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। सुनीता गुप्ता, पार्षद, वार्ड नंबर 29  

महिला डॉक्टर की दुष्कर्म और हत्या के मामले में चाहे कोई आरोपी बालिग हो या नाबालिग, सभी को फांसी की सजा होनी चाहिए। फांसी का सीधा प्रसारण टीवी पर हो, जिससे लोगों में डर पैदा हो। वीना कुमारी, अध्यापिका 
विज्ञापन

एक लड़की के साथ ऐसी दरिंदगी समाज पर कलंक है। सरकार को इस तरह की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
पूनम गुप्ता, लेखिका 

महिला सुरक्षा मामलों में सुनवाई की समय सीमा हो तय 
हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हुए जघन्य अपराध से समाज में तड़प है। दरिंदे हैवानियत की तमाम सीमाएं लांघ गए। अभी तक दिल्ली में हुए निर्भया कांड को लोग भूल नहीं पाए, लेकिन दिल को चीर देने वाले इस अपराध ने फिर लोगों के जख्म हरे कर दिए हैं। महिला सुरक्षा के संदर्भ में ज्यादा कडे़ कानून बनाने के अलावा उसे लागू किया जाए। जघन्य मामलों की सुनवाई की समय सीमा तय की जाए। तय अवधि के भीतर अपराधियों को सजा देने का प्रावधान समय की मांग है। - डॉ. रमनदीप कौर, लेक्चरर और एनएसएस प्रभारी

तेलंगाना में हुई इस घटना ने देश की तमाम व्यवस्था की पोल खोल दी है। महिला डॉक्टर के साथ इस कदर दरिंदगी की कल्पना मात्र से ही भय लगता है। दिल को दहला देने वाले कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में तुरंत कठोर दंड देकर समाज को आइना दिखाने की जरूरत है। अपराधियों के मन में अभी तक कानून का डर नहीं बैठा है। डॉ. सीमा सिंगला, समाज सेविका 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें