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#visara: हरियाणा में हजारों मौत का राज बना रहस्य, पुलिस की लापरवाही जांच पर भारी

Sun, 01 Dec 2019 08:08 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक/गुरुग्राम/चरखी दादरी (हरियाणा)
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मौत का कारण जानने के लिए पुलिस भले ही शवों का तत्काल पोस्टमार्टम करवा देती है, लेकिन जांच के लिए लैब में भेजे जाने वाले विसरा नमूने महीनों तक थाने और पोस्टमार्टम हाउस में पड़े रह जाते हैं। इसी तरह सैकड़ों विसरा नमूनों की रिपोर्ट प्रदेश की तीन लैब में साल से भी ज्यादा समय लंबित हैं। 

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ऐसे में मौत के कारणों का राज खुलने में एक वर्ष से भी अधिक का समय लग रहा है। इसके चलते मामले की जांच प्रभावित होने के साथ न्याय में भी देरी हो रही है। अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो गुरुग्राम, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ समेत कई जिलों से इस तरह की चौंकाने वाली जानकारी मिली। 

बता दें कि जहरीला पदार्थ निगलने, शराब के सेवन से हुई मौत के विसरा सैंपल को गुरुग्राम के भोंडसी स्थित लैब में भेजा जाता है, जबकि बीमारी से हुई मौत के कारणों को जानने के लिए पीजीआई रोहतक में भेजे जाते हैं। इसी तरह कुछ मामलों में विसरा करनाल लैब भेजे जाते हैं। अमर उजाला की पड़ताल में यह बात सामने आई कि कार्रवाई के झंझट से बचने के लिए पुलिस की ओर से कई बार विसरा जांच के लिए भेजा ही नहीं जाता है। यह स्थिति तब है जब सीआरपीसी की धारा-293 के तहत विसरा रिपोर्ट विशेषज्ञ की राय मानी जाती है और यह रिपोर्ट कानूनन मान्य साक्ष्य होती है।

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सिविल अस्पताल में कई माह से बोतलों में बंद पड़े हैं 30 विसरा

चरखी दादरी जिले में हुई 30 लोगों की मौत का राज सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम कक्ष में रखी बोतलों में कैद है। मृतकों का विसरा जांच के लिए अब तक मधुबन नहीं भेजा गया है। कुछ विसरे तो ऐसे हैं जिन्हें एक से डेढ़ साल हो चुका है, लेकिन अब तक जांच के लिए नहीं भेजा गया। हालांकि पुलिस प्रवक्ता संदीप पिलानिया का दावा है कि पुलिस स्तर पर कोई विसरा लंबित नहीं है।  

उधर, गुरुग्राम में प्रतिवर्ष करीब 1800 शवों का पोस्टमार्टम होते हैं। फॉरेंसिक विशेषज्ञ औसतन 25 फीसदी शवों के विसरा सैंपल को जांच के लिए लैब में भेजते है। पोस्टमार्टम हाउस से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित भोंडसी लैब में विसरा के सैंपल पहुंचने में एक महीने से ज्यादा का समय लग जाता है, जबकि 100 किमी दूर पीजीआई रोहतक तक पहुंचने में 3 से 4 महीने का समय लग जाता है। यह किसी प्रक्रिया से होकर नहीं गुजरते, बल्कि पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण सैंपल देरी से लैब तक पहुंचते हैं।

72 की मौत का राज जानने के लिए भेजे विसरा
इस साल नवंबर तक नारनौल में 72 लोगों की मौत का राज जानने के लिए विसरा लैब भेजे गए हैं। मोर्चरी से विसरा ले जाने के बाद पुलिस सैंपल को लैब में भेजने में लापरवाही बरतती है। कनीना थाना पुलिस दो केस नारनौल में कराए थे। दोनों मामलों का विसरा भेजे जाने हैं। डॉक्टरों का मानना है कि विसरा जितना जल्द लैब को भेज दिया जाए, बेहतर होता है। देर से भेजने पर रिजल्ट प्रभावित हो सकता है।

जींद में 24 मामले में विसरा रिपोर्ट का सालभर से इंतजार

जिले में 24 ऐसे मामले हैं, जिनमें एक साल या इससे अधिक समय से विसरा रिपोर्ट नहीं आई है। इसके चलते कई मामलों की परतें नहीं खुल पा रही हैं। अदालत में इन मामलों की सुनवाई भी लंबित हैं। सवाल यह उठता है कि एक-दो महीने में आने वाली विसरा रिपोर्ट में इतनी देरी क्यों हो रही है।

विसरा रिपोर्ट के लिए परिजन काट रहे हैं थानों के चक्कर
बीते चार महीनों में 43 शवों के विसरे करनाल की मधुबन लैब भेजे जा चुके हैं। मृतका अमनदीप कौर की विसरा रिपोर्ट अभी तक उसके परिजनों तक नहीं पहुंची है। जिसके चलते मृतका का पति हरजिंद्र सिंह निरंतर पुलिस थानों के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।

हिसार से 437 विसरा मधुबन लैब भेजे गए
जिला नागरिक अस्पताल से जनवरी से लेकर अब तक 437 शवों के विसरा जांच के लिए करनाल के मधुबन स्थित लैब में भेजे जा चुके हैं। अगर किसी की मौत शराब के अधिक सेवन से होती है या हार्ट अटैक के कारण होती है तो उस शव का विसरा अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भेजा जाता है।
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450 केसों में विसरा रिपोर्ट का इंतजार

भिवानी जिले से इस साल अब तक करीब 450 केसों में विसरा जांच के लिए लैब भेजे गए। इनमें से अधिकतर केसों की रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। यहां तक कि वर्ष 2018 की भी थाना अनुसार 20 से 25 फीसदी विसरा रिपोर्ट लंबित है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बड़े आपराधिक मामलों की रिपोर्ट पहले मंगवा ली जाती है। सिर्फ इत्तेफाकिया मौत के मामलों की ही रिपोर्ट लंबित है।

रिपोर्ट न आने से 162 मामलों में जांच की अटकी
रेवाड़ी जिले में लगभग 162 मामले ऐसे हैं, जिनकी विसरा रिपोर्ट थानों तक नहीं पहुंच पाई हैं। रिपोर्ट में कई सालों की देरी से न तो उन मामलों में मौत का कारण पता चल पाया है और न ही पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ पाई है। डीएसपी जमान खान ने माना कि कई मामलों में विसरा रिपोर्ट मिलने में देरी की वजह से जांच में देरी हो जाती है।

13 विसरा जांच के लिए भेजे, एक की मिली रिपोर्ट
 पिछले छह माह में फतेहाबाद जिले से 13 शवों के विसरा जांच के लिए मधुबन भेजे गए थे, जिनमें से एक ही मामले की रिपोर्ट आ पाई है। पुलिस विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक साल में 17 मामलों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई है।
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