अब तक प्राप्त हुई कॉल संबंधी विवरण देते हुए डीजीपी ने कहा कि पुलिस पेट्रोलिंग पार्टियों की तरफ से फोन करने वाले तक पहुंचने के लिए कम से कम सात मिनट और अधिक से अधिक 30 मिनट का समय था और औसतन यह समय 12 मिनट का था। पुलिस पार्टियों ने बुलाने वालों को उनके निवास स्थान /जगह पर सुरक्षित ढंग से छोड़ा, जहां वह जाना चाहते थे।
कुछ मामलों में, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की महिला पत्रकारों ने पुलिस प्रतिक्रिया समय की जांच करने के लिए पुलिस कंट्रोल रूम को डमी कॉल भी की और इसकी सफलतापूर्वक पुष्टि की। डीजीपी ने कहा कि अधिकतर मामलों में महिला पुलिस अधिकारी पीसीआर में मौजूद थी। उन्होंने बताया कि यह स्कीम अभी शुरुआती चरण में है और इसलिए कुछ समस्याएं भी आ रही हैं। इस स्कीम को और सुचारु बनाया जा रहा है। एक बार ऐसा हो जाने के बाद मुसीबत में महिलाओं की मदद करने के लिए सभी पीसीआर वैनों में एक महिला सिपाही मौजूद होंगी।
दिन में भी पुलिस कर रही महिलाओं की मदद : डीजीपी
डीजीपी ने कहा कि चाहे यह योजना अधिकारिक तौर पर रात नौ बजे से सुबह छह बजे के दौरान कठिनाई में फंसी महिलाओं के लिए घोषित की गई है लेकिन मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर पुलिस को निर्देश दिया है कि दिन के किसी समय भी असुरक्षित महसूस करती महिलाओं को सहायता प्रदान की जाएं। इस निर्देश पर अमल करते हुए पठानकोट पुलिस ने पांच दिसंबर को सुबह 8.05 बजे फोन करने वाली महिला की मदद करते हुए उसे सुरक्षित घर छोड़ दिया था।
रात में अकेली महिला के लिए हेल्पलाइन पर पहुंच रही कॉल
राहगीरों द्वारा रात को किसी महिला को अकेली देखकर भी पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल की जा रही है। ऐसी ही एक कॉल छह दिसंबर को मध्यरात्रि 12.16 बजे की गई, जब दानेश नाम के व्यक्ति ने 112 हेल्पलाइन पर फोन करके पुलिस को बुलाया कि महिला लाढोवाली चुबती फाटक जालंधर में अकेली खड़ी है। महिला एएसआई वाली पीसीआर ने उस महिला को 14 मिनट में घर छोड़ दिया।