केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने 27 साल से लटके महिला आरक्षण विधेयक को सोमवार रात मंजूरी देने के साथ मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया है। अब इसे लोकसभा और राज्यसभा से पास कराने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से कानूनी रूप दिया जाएगा। यदि कानून बन जाता है तो आगे से हरियाणा के विधानसभा चुनाव में 90 में से 30 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
नारी सशक्तीकरण का नारा बुलंद करने वाले हरियाणा में महिलाओं का राजनीति में दखल बहुत कम रहा है। हालांकि प्रत्येक विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने अपना हक मांगने की कोशिश की, लेकिन राज्य की जनता को महिलाओं की चौधर मंजूर नहीं हुई। साल 2014 में सर्वाधिक 13 महिलाएं विधानसभा पहुंची थीं।
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साल 1966 में हरियाणा का गठन होने के बाद से अब तक 13 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। तीन चुनावों को छोड़ दिया जाए तो बाकी किसी भी विधानसभा चुनाव में 10 प्रतिशत सीटें भी महिलाओं के हिस्से में नहीं आईं हैं। वर्ष 2005 के चुनाव से विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़नी शुरू हुई, लेकिन 14वीं विधानसभा में सिर्फ नौ महिलाएं ही विधानसभा पहुंच सकीं। अब आरक्षण लागू होने के बाद प्रदेश की राजनीति में महिलाओं का दखल बढ़ना तय है।
प्रसन्नी देवी पांच बार पहुंचीं विधानसभा
हरियाणा में प्रसन्नी देवी एक मात्र महिला हैं जो पांच बार विधानसभा पहुंची हैं। प्रसन्नी देवी ने कांग्रेस के टिकट पर करनाल के इंद्री हलके से 1967, 1968 और 1972 में चुनाव जीता। इसके बाद 1982 और 2005 में उन्होंने पानीपत के नौल्था विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की। इसके अलावा शकुंतला भगवाड़िया, गीता भुक्कल और किरण चौधरी चार-चार बार सदन पहुंच चुकी हैं।
14वीं विधानसभा में ये महिलाएं चुनी गईं विधायक
हरियाणा में 14वीं विधानसभा के चुनावी रण में भले ही किस्मत आजमाने के लिए 104 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरीं, लेकिन विधानसभा में पहुंचने में सफलता सिर्फ नौ महिलाओं को ही मिली। इनमें कांग्रेस से पांच, भाजपा से तीन और जजपा से एक महिला विधायक चुनी गई। कांग्रेस से झज्जर से गीता भुक्कल व तोशाम से किरण चौधरी लगातार चौथी बार विधायक चुनी गई हैं और कलानौर हलके से शंकुतला खटक तीसरी बार विधानसभा पहुंची हैं। इसके अलावा नारायणगढ़ से शैली और सढौरा से रेणूबाला कांग्रेस से विधायक चुनी गई हैं। भाजपा से गन्नौर विधानसभा से निर्मल रानी, कलायत से कमलेश ढांडा और बड़खल हलके से सीमा त्रिखा विधायक चुनी गईं। जजपा से बाढड़ा विधानसभा से नैना चौटाला विधानसभा पहुंची हैं।
25 साल की उम्र में हरियाणा सरकार में मंत्री बनीं सुषमा स्वराज
हरियाणा की बेटी और भाजपा की कद्दावर नेता रहीं स्व. सुषमा स्वराज साल 1977 में जनता पार्टी और 1987 में भाजपा के टिकट पर अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र चुनाव जीती थीं। वे 25 साल की उम्र में जनता पार्टी की हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी थीं। बाद में दिल्ली की राजनीति में चली गईं। वहां दिल्ली की मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रहीं।
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चंद्रावती हरियाणा क्षेत्र की पहली महिला विधायक
1928 में दादरी जिले के डालावास गांव में पैदा हुई चंद्रावती के नाम हरियाणा की पहली महिला विधायक होने का गौरव दर्ज है। संयुक्त पंजाब विधानसभा के 1954 में हुए मध्यावधि चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बाढ़डा निर्वाचन क्षेत्र (तब महेंद्रगढ़) से जीत हासिल की थी। चंद्रावती हरियाणा क्षेत्र की पहली महिला वकील भी थीं।
पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण
लोकतंत्र में सबसे छोटी सरकार कही जाने वाली पंचायतों में महिलाओं का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। मनोहर लाल सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया है। इससे पिछले चुनाव में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू था, लेकिन 41 प्रतिशत से अधिक महिलाएं जीत हासिल कर सरपंच बनी थीं।
2014 में सबसे ज्यादा 13 महिलाएं विधानसभा में पहुंचीं
चुनावी वर्ष महिला विधायकों की संख्या
1967 4
1968 7
1972 4
1977 4
1982 7
1987 5
1991 6
1996 4
2000 4
2005 11
2009 9
2014 13
2019 9
हम महिला आरक्षण का स्वागत करते हैं। मगर मोदी सरकार जो बिल लाई है, इसमें महिलाओं को कोई आरक्षण मिलने वाला नहीं है। क्योंकि इसमें प्रावधान है कि इस बिल के बाद जनगणना होगी। उसके बाद परिसीमन के आधार पर बिल लागू करने की बात कही गई है। इसमें कम से कम पांच से सात साल का समय लग सकता है। जो मोदी सरकार रातोरात लॉकडाउन लगा सकती है, नोटबंदी कर सकती है, वह इस बिल को लागू करने में इतना समय क्यों ले रही है। - अनुराग ढांडा, वरिष्ठ उपप्रधान, आम आदमी पार्टी
देश की संसद व विधानसभा में एक तिहाई महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिल रहा है तो समझा जा सकता है कि कितना बड़ा बदलाव है। आधी आबादी के लिए यह एक क्रांति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बिल सिरे चढ़ रहा है। कुछ लोग इसकी शुरुआत करने का श्रेय ले रहे हैं। शुरुआत तो कई बार हुई, मगर सिरे चढ़ाना पीएम मोदी के सिवाय किसी के बस की बात नहीं है। अभिनंदन मोदी जी, बधाई नारी शक्ति। - ओमप्रकाश धनखड़, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
कांग्रेस शुरू से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के हक में रही है। 2010 में कांग्रेस राज्यसभा में यह प्रस्ताव लाई थी। इसके अलावा, खुद सोनिया गांधी ने महिलाओं को आरक्षण देने के लिए पत्र लिखा और कहा कि वह इसके समर्थन में हैं। इससे महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी। -चौधरी उदयभान, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस।