जाट आरक्षण आंदोलन पर प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के खिलाफ उतरते हुए महिला IAS ने सौ फीसदी झूठी रिपोर्ट करार दिया। दरअसल झज्जर की डीसी अनीता यादव प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में खुद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने से बेहद खफा हैं।
अनीता यादव ने कमेटी की रिपोर्ट को सौ प्रतिशत झूठा करार देते हुए कहा है कि एक पुलिस वाले ने दूसरे पुलिस वाले का बचाव किया है। जबकि हकीकत क्या है यह झज्जर की जनता बखूबी जानती है। वह अगली कार्यवाही के लिए कानूनी सलाह लेंगी, आखिर कोई किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी कैसे कर सकता है? डीसी ने यह भी कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि सरकार न्याय करेगी।
मंगलवार को सार्वजनिक हुई प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार झज्जर डीसी ने जाट आरक्षण आंदोलन में हुए उपद्रव के दौरान खुद को ऑफिस तक ही सीमित रखा। रिपोर्ट में एसपी का बचाव किया गया है। बुधवार को डीसी अनीता यादव ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट ने एक भगोड़े व्यक्ति को बहादुर बताया है, जो कि गलत है। एक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए तीन-तीन जगहों से भाग गया। उसे बहादुर कहना न्यायोचित नहीं है।
जब पूरा शहर जल रहा था तो एसपी कहीं भी दिखाई नहीं दिए। जहांआरा बाग स्टेडियम के नजदीक जहां तीन मौतें हुईं, वहां से भी एसपी भाग गए थे। स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के अंदर जब गार्ड जीवन और मौत से जूझते हुए उपद्रवियों से लड़ रहा था तो बार-बार कहने के बावजूद एसपी ने गार्ड को बाहर नहीं निकलवाया। इसी तरह छावनी मोहल्ला, जहां सबसे ज्यादा हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं, वहां पर भी एसपी मौका छोड़ कर भाग गए।
ऐसे व्यक्ति को बहादुर कहना मेरी समझ के परे है। डीसी ने कहा कि दंगों से पहले ही थानों, चौकियों को खाली करवा लेना कैसी बहादुरी है। शहरवासी जानते हैं कि किसने अपनी ड्यूटी निभाई और किसने अपनी ड्यूटी नहीं निभाई। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट झज्जर जिले के संदर्भ में सौ की सौ फीसदी झूठी है।