गांव बडाला में एक ऑटो में महिला का प्रसव करवाती हुई नर्स।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सरकारी अस्पताल खरड़ में आई एक गर्भवती महिला को अस्पताल के स्टाफ ने बिना जांच वापस भेज दिया। स्टाफ का कहना था कि इसे पीजीआई ले जाओ हम कुछ नहीं कर सकते हैं। इसके बाद वापस लौटते समय महिला की ऑटो में ही डिलीवरी हो गई। सूचना मिलते ही इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और और परिवार की मदद की।
सामाजिक कार्यकर्ता रघवीर सिंह बडाला ने बताया कि रविवार दोपहर को वह गांव बडाला के बस स्टैंड पर स्थित राणा मेडिकल स्टोर के पास मौजूद थे। इसी दौरान एक ऑटो में प्रवासी मजदूरों का परिवार उनके पास आया और मदद की गुहार लगाने लगा। इसी बीच उन्होंने देखा कि ऑटो में एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती और खून से लथपथ पड़ी थी और उसका देवर नवजात बच्चे को नाल समेत पकड़ कर बैठा हुआ था। मेडिकल स्टोर के मालिक राजेश राणा ने तुरंत एक निजी नर्स को फोन कर बुलाया।
पति बोला- स्वास्थ्य केन्द्र से सरकारी अस्पताल किया था रेफर
पीड़िता के पति ने बताया कि वह नजदीकी गांव पोपना में एक जमींदार की मोटर पर अपनी चार बेटियों व भाई के साथ रहता है। वह अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर गांव के स्वास्थ्य केन्द्र गया था, जहां एएनएम नरिंदरजीत कौर ने उन्हें प्राथमिक सहायता देकर सरकारी अस्पताल खरड़ भेज दिया। पत्नी को लेकर वह सरकारी अस्पताल पहुंचा, जहां ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने उसे दाखिल करने की बजाए, बिना चेक किए ही यह कह कर वापस भेज दिया कि इसे मोहाली फेस छह अस्पताल में दिखाओ या पीजीआई ले जाओ, हम कुछ नहीं कर सकते हैं।
इसके बाद पैसे न होने पर वह अपनी पत्नी को ऑटो में लेकर अपने गांव को जा रहा था, परंतु रास्ते में ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और उसने ऑटो में ही बच्चे को जन्म दे दिया। उन्होंने कहा कि यदि कुछ सामाजिक कार्यकर्ता उनकी मदद न करते तो उनके साथ कोई भी घटना हो सकती थी।
मैं कोरोना वायरस व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण अपने घर में ही क्वारंटीन हूं परंतु यदि अस्पताल के स्टाफ ने ऐसा किया है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। डॉ. मनोहर सिह, सीनियर मेडिकल अफसर।