चंडीगढ़। सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी कब्जाने के मामले में मंगलवार को अदालत में सुनवाई हुई। पुलिस सुरक्षा के बीच दो गवाहों तरुण उर्फ तरसेम और मेडिकल स्टोर संचालक अमित गुप्ता को आरोपियों के खिलाफ गवाही देनी थी। इस बीच आरोपियों से मिलने आए लोगों को देखकर गवाह डर गए। एक गवाह अदालत में जज के सामने अपनी जान को खतरा बताते हुए रोने लगा। अदालत पुलिस को आदेश जारी कर कहा कि गवाहों को सुरक्षा दी जाए। वर्क सस्पेंड के कारण आरोपियों के वकील अदालत में पेश नहीं हुए। जज ने अगली सुनवाई के लिए बुधवार का दिन तय कर दिया।
कोठी हड़पने के मामले में बीते दिनों अदालत ने 11 महीने बाद 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल शुरू करने के आदेश दिए थे। मामले में मुख्य आरोपी पत्रकार संजीव महाजन, सतपाल डागर, मनीष गुप्ता, सौरभ गुप्ता, अशोक अरोड़ा, दलजीत सिंह उर्फ रूबल, पूर्व थाना प्रभारी राजदीप सिंह, शराब कारोबारी अरविंद सिंगला, गुरप्रीत सिंह उर्फ नकली राहुल मेहता और खलिंदर सिंह कादियान के खिलाफ अदालत ने आरोप तय कर दिए थे।
मंगलवार से केस का ट्रायल शुरू होना था। इसमें दो गवाह पुलिस सुरक्षा के बीच गवाही देने अदालत पहुंचे थे। अदालत में वर्क सस्पेंड के कारण काफी देर तक सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान आरोपियों से भारी संख्या में मिलने पहुंचे लोगों से गवाहों का आमना-सामना हो गया, जिससे गवाह घबरा गए। गवाहों ने जज के सामने अपनी समस्या रखी तो अदालत ने तत्काल एसएसपी को गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश जारी किए। ज्ञात रहे कि मामले में अदालत ने मुख्य केस के साथ-साथ संजीव महाजन, अरविंद सिंगला, सतपाल डागर और खलिंदर कादियान पर फर्जी हस्ताक्षर करने के मामलों में भी केस चलाने के आदेश जारी कर दिए हैं।
अमित गुप्ता की दुकान से दवा लेता था राहुल
पुलिस ने ृचार्जशीट में कहा है कि जिस केमिस्ट की दुकान से राहुल मेहता दवाइयां लेता था, उसके मालिक अमित गुप्ता को तत्कालीन थाना प्रभारी राजदीप सिंह ने मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इससे वह अपनी दुकान और सेक्टर-37 छोड़ने के लिए मजबूर हो गया था। पुलिस ने कहा कि राजदीप सिंह ने खुद को कानून से ऊपर रखकर शक्ति का दुरुपयोग कर आम जनता के बीच में डर और अविश्वास का माहौल पैदा किया। इसका खामियाजा बेगुनाह अमित गुप्ता को अपने परिवार की सलामती के लिए सेक्टर 37 छोड़कर चुकाना पड़ा।