बजट सरकार और हर नागरिक की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। केंद्रीय बजट 2022-23 कोरोना महामारी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। यह बजट रोजगार पैदा करने और कृषि अर्थव्यवस्था को सुधारने की ओर एक अच्छा कदम माना जा सकता है।
टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होने से आम आदमी को मायूसी जरूर हुई है। व्यक्तिगत करदाताओं को उम्मीद थी कि महामारी व महंगाई के दौर में शायद उन्हें कोई राहत मिलेगी। बजट में पीएम आवास योजना के तहत 80 लाख घरों के निर्माण, हर घर नल योजना का विस्तार, 60 लाख नए रोजगार का सृजन, लघु उद्योगों को छह हजार करोड़ देने की योजना, एमएसपी का भुगतान सीधे किसानों के खाते में देने की योजना, जैविक खेती को बढ़ावा देने, खेतों के कागजात का डिजिटलीकरण आदि सराहनीय कदम हैं।
कुल मिलाकर यह बजट कृषि व रोजगार पर आधारित है। यहां आत्मनिर्भर भारत से 16 लाख नौकरियां देने की बात कही गई है। किसानों को एमएसपी के लिए 2.7 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य गेहूं व धान की खरीद के लिए भी 2.37 लाख करोड़ रुपये का भी भुगतान करेगी। बजट का फोकस ग्रोथ व इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करने, रोजगार सृजन करना है। बजट में रोजगार, मकान, लघु उद्योग और शिक्षा आदि में बड़ी घोषणाएं आत्मनिर्भर भारत अभियान को और सशक्त करेगा।
-डॉ. तिलक राज, अर्थशास्त्री, पीयू
किसान, कर्मचारियों, युवाओं और घर खरीदने वालों के लिए सरकार ने खोले द्वार
39.45 लाख करोड़ रुपये का यह बजट चार प्राथमिकताएं निर्धारित करता है। पीएम गतिशक्ति, समावेशी विकास (इंक्लूसिव डेवलपमेंट), उत्पादकता वृद्धि व निवेश और इन्वेस्टमेंट फाइनेंसिंग। पीएम गतिशक्ति सात इंजनों से चल रहा है। इसमें सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, जन परिवहन, जलमार्ग और लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
इसी तरह समावेशी विकास में कृषि विकास, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, शिक्षा विकास एवं स्वास्थ्य आदि पर फोकस किया गया है। उत्पादकता वृद्धि के लिए 1486 कानूनों को निरस्त करने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2.0 लांच करने के साथ शहरी विकास एवं आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया गया है। इन्वेस्टमेंट फाइनेंसिंग को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत व्यय में पिछले साल की अपेक्षा 35.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान है।
केंद्रीय बजट 2022 जनता और सरकार के लिए एक नाजुक समय पर आया। इस समय पांच राज्यों में विस चुनाव हैं। साथ ही ओमिक्रॉन, धीमा आर्थिक सुधार, राजकोषीय घाटा (6.4%), स्लो टैक्स कलेक्शन आदि की चुनौती है। इनकम टैक्स स्लैब में किसी भी तरह का बदलाव न होने से मध्य वर्ग जरूर निराश हुआ है।
विशेषज्ञ यह मान कर चल रहे थे कि महंगाई और महामारी के चलते सरकार टैक्स स्लैब में कुछ राहत दे सकती है। दूसरी ओर सरकार ने किसानों, सरकारी कर्मचारियों, युवाओं और घर खरीदने वालों को खुश करने की कोशिश की है। पीएम आवास योजना के लाभार्थियों के लिए 80 लाख मकानों का निर्माण पूरा किया जाना, युवाओं के लिए 30 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना, किसानों को एमएसपी के जरिए 2.3 लाख करोड़ रुपये देने का लक्ष्य रखा जाना और राष्ट्रीय राजमार्गों का 25 हजार किलोमीटर तक विस्तार करना वास्तव में अच्छे प्रस्ताव हैं लेकिन यह अपने आप में चुनौती भी हैं।
बात अर्थव्यवस्था की करें तो भारत की जीडीपी पहले ही तीन ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुकी है। आर्थिक सर्वे 2022 ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के 8 से 8.5 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है, जबकि 2021-22 के लिए ग्रोथ रेट 9.2 प्रतिशत अनुमानित किया गया है। क्या यह बजट भारत को 2026 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने का खाका है? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
-प्रो. मधुर महाजन, वरिष्ठ अर्थशास्त्री, एसडी कॉलेज