इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
टूटी सड़कें व धूल: वायु प्रदूषण बढ़ाने में सड़कों की धूल का काफी अहम रोल होता है। टूटी सड़कों में अक्सर धूल जमा हो जाती है। वाहनों की आवाजाही से यह धूल उड़ती रहती है। एचएसपीसीबी ने नगर पालिकाओं से कहा है कि सर्दियां शुरू होने से पहले क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करें। परिवहन विभाग को यातायात से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर ट्रैफिक को नियंत्रित करने का निर्देश जारी किया। नगर पालिका प्राधिकरण को सड़कों की साफ-सफाई के लिए अतिरिक्त मशीनें व स्प्रिंकलर की व्यवस्था करने को कहा है। यह भी निर्देश दिया है कि जरूरी हो तो किराये पर लेकर उसका व्यापक इस्तेमाल शुरू कर दें।
निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां: भवन निर्माण संबंधी जानकारियां प्रदूषण बोर्ड के डस्ट पोर्टल में पंजीकृत कराना जरूरी होगा। पांच हजार स्कावयर मीटर से 10 हजार स्कावायर मीटर तक के निर्माण के लिए एक एंटी-स्मॉग गन, दस से 15 हजार स्कवायर मीटर के लिए दो, 15 से 20 हजार स्कवायर मीटर के लिए तीन और 20 हजार स्कवायर मीटर से ऊपर के लिए एंटी-स्मॉग गन लगाने का निर्देश दिया है।
पटाखों पर रोक: हरियाणा सरकार ने एक नवंबर से 31 जनवरी 2024 तक पटाखों के निर्माण, बेचने और खरीदने पर प्रतिबंध लगाया है। सिर्फ ग्रीन पटाखे की चलाने की अनुमति होगी।
वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम: हरियाणा में 29 रियल टाइम निगरानी सिस्टम है। 32 मैन्युअल निगरानी सिस्टम हैं। 23 अतिरिक्त वास्तविक समय निगरानी स्टेशनों की खरीद का
प्रस्ताव विचाराधीन है। चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ में पांच-पांच रियल टाइम निगरानी सिस्टम लगाए जाने हैं। इसकी खरीद की तैयारी चल रही है। इसके अलावा पांच जिले रेवाड़ी, झज्जर, चरखी दादरी, रोहतक और जींद में प्रदूषण के स्रोत को जानने के लिए स्टडी करवाई जाएगी, ताकि उन स्रोतों पर लगाम कसी जा सके।
कूड़ा जलाने पर रोक: कूड़े की आग से निकला धुआं भी प्रदूषण बढ़ाने में काफी जिम्मेदार माना जाता है। एक्शन प्लान में शहरी निकायों को निर्देश दिया गया है कि खुले में अनाधिकृत रूप से जलाए जाने वाले कचरे की निगरानी करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।