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Chandigarh News: ज्योति की अंतिम रिपोर्ट के लिए अभी करना होगा इंतजार

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में करंट लगने से हुई छात्रा ज्योति की मौत के मामले में मौत का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पोस्टमार्टम के दौरान मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर विशेषज्ञों ने मृतका के महत्वपूर्ण अंगों के नमूने हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए जीएमसीएच-32 भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही डॉक्टर अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करेंगे। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत करंट लगने से हुई थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
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विशेषज्ञों के अनुसार हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में अंगों के सूक्ष्म ऊतकों का माइक्रोस्कोप से अध्ययन किया जाता है। इसके लिए छोटे टिश्यू सैंपल लेकर उन्हें विशेष रसायनों में सुरक्षित किया जाता है। इसके बाद टिश्यू को प्रोसेस कर पैराफिन ब्लॉक तैयार किए जाते हैं और बेहद पतली स्लाइड बनाकर विशेष रंगों से रंगा जाता है। पैथोलॉजिस्ट माइक्रोस्कोप से इन स्लाइड की जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त विशेष परीक्षण भी किए जाते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार यह प्रक्रिया सामान्य पोस्टमार्टम की तुलना में अधिक समय लेती है। सामान्य स्थिति में रिपोर्ट आने में दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ने पर यह समय तीन से चार सप्ताह या इससे अधिक भी हो सकता है। जांच में करंट से संबंधित ऊतक परिवर्तन या अन्य महत्वपूर्ण संकेत मिलने पर उन्हें अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियों को रिपोर्ट का इंतजार है, क्योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई में यह महत्वपूर्ण साक्ष्य होगी।
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ये होती है हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच
अंगों के सूक्ष्म ऊतकों की माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है।
टिश्यू को विशेष रसायनों में सुरक्षित कर स्लाइड तैयार की जाती है।
विशेषज्ञ कोशिकाओं में जलन, क्षति, सूजन या अन्य बदलावों का अध्ययन करते हैं।
जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त विशेष परीक्षण भी किए जाते हैं।
रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारण की पुष्टि या खंडन किया जाता है।
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