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प्रयोग की पीपीई किट दोबारा कर सकेंगे इस्तेमाल

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चंडीगढ़। पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) का प्रयोग अब दोबारा किया जा सकेगा। इसका शोधन विकासशील विधियों के जरिये किया जा सकता है। इस पर पीयू के माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर एवं डीन साइंसेज प्रो. प्रिंस शर्मा व डॉ. नवीन गुप्ता, प्रो. डीआर गुप्ता ने रिसर्च शुरू की है। इस टीम का मानना है कि पीपीई किट प्रयोग के बाद बेकार हो जाती है। यह पर्यावरण के लिए खतरनाक है। इसके अलावा मास्क, फेस शील्ड व अन्य चीजें भी प्रयोग के बाद दोबारा यूज में नहीं लाई जा सकती। इस समय कचरे के ढेर में यह पीपीई जमा हो गई हैं।
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रिसर्च के दौरान ऐसी विधि निकाली जाएगी कि पीपीई आदि में कोई बदलाव हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि पीपीई आदि को डिटर्जेंट, अल्कोहल, सैनिटाइजर या ब्लीच से धोने के साधारण तरीके विफल हैं। एसोसिएशन ऑफ माइक्रोबायोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया के चंडीगढ़ यूनिट के अध्यक्ष प्रो. प्रिंस शर्मा और सचिव डॉ. डीआर गुप्ता पीपीई के पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि यह किफायती होने के अलावा पर्यावरण की चिंता और सुरक्षा का विषय है। उन्होंने जनता से कहा है कि वह बहुस्तरीय सूती मुखौटे का उपयोग करें क्योंकि यह धोने योग्य और पुन: उपयोग योग्य हैं।
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