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इनकम टैक्स भरना क्यों है जरूरी? जानिए 10 बड़े फायदे

Mon, 10 Aug 2015 03:15 PM IST
अमरीश शर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
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आप टैक्स के दायरे में आते हो या नहीं, आपको इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) जरूर फाइल करना चाहिए। आप वेतनभोगी हैं या व्यापारी या फिर चाहे खुद का कारोबार हो, अगर आपकी इनकम 5 लाख रुपये सालाना से कम है तो भी आईटीआर जरूर फाइल करें। इससे सरकार के साथ-साथ आपको भी फायदा होगा।
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वित्त मंत्रालय ने इस साल आईटीआर फाइल करने के लिए भरे जाने वाले फार्म में काफी बदलाव किए हैं। नए फारमेट को काफी सरल और सुविधाजनक बनाया गया है। आमतौर पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई होती है, लेकिन इस बार फार्म में बदलाव के कारण एक महीना बढ़ाते हुए इसे 31 अगस्त कर दिया गया है।

इसलिए अगर आपने अब तक अपनी सालाना इनकम की जानकारी सरकार को नहीं दी है तो आप 31 अगस्त से पहले-पहले आईटीआर फाइल कर सकते हैं। टैक्स फाइलिंग प्रोसेस और डॉक्युमेंटेशन के बारे में एडवोकेट और टैक्स मामलों के एक्सपर्ट हितेश कुमार पुरी ने बताया कि इस साल नए आईटीआर फार्म में टैक्सपेयर्स से अतिरिक्त सूचनाएं मांगी जा रही हैं।
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साथ ही रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस करते हुए ऑनलाइन कर दिया गया है। टैक्सपेयर्स होने के नाते आपको इनकी जानकारी होनी चाहिए, नहीं तो गलत रिटर्न फाइल करने पर इसे रिजेक्ट कर दिया जाता है।

31 अगस्त तक कर दें रिटर्न फाइल

इस साल टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। टैक्स रिटर्न फाइल करने के फार्म में बदलाव के कारण आईटीआर भरने की तिथि एक महीने बढ़ाई गई है। अगर आपके पास सभी कागजात जैसे कि फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट, टीडीएस डिटेल्स आदि हैं, तो 31 अगस्त से पहले हर हाल में रिटर्न फाइल कर दें।

आधार कार्ड का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
ऑनलाइन आईटीआर फाइल करते समय लोग आधार कार्ड नंबर भी दर्ज करा सकते हैं। इसके तहत वह यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) का जिक्र कर सकते हैं। आधार के अलावा तीन अन्य तरीकों से भी टैक्सपेयर की पहचान होती है। हालांकि, अगर आप ऑनलाइन टैक्स फाइल करते वक्त इनमें से किसी भी तरीके का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो आईटीआर-V को भरने के बाद इसकी कॉपी मेल या स्पीड पोस्ट के जरिये सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर बेंगलुरु भेज सकते हैं।

ई फाइलिंग हुई आसान, बेंगलुरु नहीं भेजना होगा पेपर
एक्सपर्ट हितेश पुरी के अनुसार इस साल से ज्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए सही अर्थों में ई-फाइलिंग पेपरलेस हो गई है। अब तक ई-फाइलिंग के बाद साइन किया हुआ आईटीआर-V फॉर्म बेंगलुरु में सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) में भेजना पड़ता था। इसका मकसद टैक्सपेयर की पहचान करना था।

अब इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (ईवीसी) के जरिये इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आइडेंटिटी रिटर्न्स को वेरिफाई किया जा सकता है। 10 डिजिट वाला ईवीसी एक शब्दों और अंकों वाला कोड है, जो हर पैन कार्डधारक के लिए यूनिक होगा। यह ई-फाइलिंग करने वाले का इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन होगा। एचयूएफ के मामले में टैक्स भरने वाले का ईवीसी वेरिफिकेशन होगा।

2.70 लाख से अधिक सालाना इनकम पर ही आईटीआर

कई नौकरीपेशा या छोटे कारोबारी जिनकी सालाना आय 2.50 लाख से कम है, उनमें भ्रम है कि वह इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते या उन्होंने सारे टैक्स चुका दिए हैं तो उन्हें रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं है। यह गलत सोच है।

सीनियर अकाउंटेंट और टैक्स मामलों के एक्सपर्ट प्रभाष कुमार कहते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने टैक्स दिया है या नहीं। अगर आपका सारा टैक्स आपकी कंपनी और बैंक ने टीडीएस के जरिये चुका दिया है या आपने एडवांस टैक्स दिया है तो भी सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये से अधिक होने पर आपको रिटर्न फाइल करना पड़ेगा।

वहीं प्रभाष के अनुसार अगर आपकी सैलरी से टीडीएस कटा है और आप इनकम टैक्स पैयर के दायरे में नहीं आते हैं तो आपको फार्म-16ए हर हाल में भरना चाहिए। इससे आपका टीडीएस अमाउंट आपको वापस मिलता है।

जल्द मिलता है रिफंड

एक्सपर्ट प्रभाष के अनुसार जो टैक्सपैयर्स रिफंड के लिए क्लेम करते हैं, उनके लिए ई-फाइलिंग अनिवार्य कर दी गई है। अगर किसी की सालाना आय पांच लाख रुपये से कम है, तो भी उन्हें ऑनलाइन रिटर्न फाइल करना होगा। हालांकि, यह नियम 80 साल से अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटिजंस पर लागू नहीं होगा। वे पेपरों के जरिए भी अपनी रिटर्न भर सकते हैं।

हालांकि, ऑनलाइन फाइल करने पर इसकी प्रक्रिया तेजी से होती है और रिफंड भी जल्द मिलता है। अब तो रिटर्न फाइल करने के एक महीने के अंदर ही आयकर विभाग रिफंड अमाउंट सीधे आपके बैंक अकाउंट में भेज देता है। इसमें देरी होने पर आप ऑनलाइन टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया का स्टेटस भी चेक कर सकते हैं।

विदेशी दौरों और बैंक खातों की जानकारी अनिवार्य

टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त इस बात का जरूर ध्यान रखें कि अगर आपने फाइनेंशियल ईयर में कोई विदेश का दौरा किया है तो इसकी जानकारी जरूर दें।

चाहे आप एक बार विदेश गए हों या एक से अधिक बार। हालांकि विदेशी दौरों के दौरान खर्च की गई रकम की जानकारी नहीं मांगी गई है। इसके साथ ही अपने सभी बैंक खातों (अगर विदेश में भी कोई है तो) की जानकारी भी दें।

चाहे वह सेविंग अकाउंट हो, करंट या फिर ज्वाइंट अकाउंट। विदेशी दौरों की जानकारी पहले वाले फार्म में न होने के कारण ही सरकार को आईटीआर फार्म में बदलाव करने पड़े। हालांकि नए फार्म बहुत ही आसान और सामान्य हैं, जिन्हें भरने में भी कोई परेशानी भी नहीं होगी।

विदेशी संपत्ति और आय का भी देना होगा ब्योरा

नए फार्म में विदेशी संपत्ति और आय के बारे में टैक्सपैयर्स को सभी जानकारियां देनी होंगी। इसमें रकम, आय का स्रोत, टैक्स योग्यता और किस देश से आय हो रही है, इसकी जानकारी भी देनी होगी।

वहीं अगर कोई डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (डीटीएए) के तहत टैक्स छूट के लिए क्लेम करना चाहता है तो रिटर्न में उसका ब्योरा होना चाहिए। इसी तरह अगर आपके पास देश से बाहर किसी भी तरह की चल-अचल संपत्ति है तो मालिकाना हक, उसे खरीदने की तारीख, संपत्ति से होने वाली आय और टैक्स के लिए दिखाई गई रकम के बारे में बताना होगा।

अगर किसी विदेशी ईकाई में आपकी वित्तीय दिलचस्पी है तो उसकी भी जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। मालिकाना हक के अलावा विदेश में किसी संपत्ति के लाभार्थी हैं या उससे आय हो रही है तो इसकी सारी डिटेल आईटीआर फॉर्म भरते वक्त देना अनिवार्य कर दिया गया है।

वन टाइम पासवर्ड सुविधा लॉन्च

टैक्स मामलों के एक्सपर्ट हितेश पुरी के अनुसार सीबीडीटी ने इनकम टैक्स भरने के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) की सुविधा लॉन्च की है।

इससे आपको ऑनलाइन आईटीआर रिटर्न भरने के बाद उसकी हार्ड कॉपी इनकम टैक्स के बेंगलुरु स्थित सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर नहीं भेजनी होगी। यह ओटीपी दस नंबर का होगा।

आयकर विभाग हर करदाता को ओटीपी भेजेगा। एक बार नंबर का इस्तेमाल करने पर कोई दूसरा इसे इस्तेमाल नहीं कर सकता। एक पैन कार्ड नंबर के लिए एक यूनिक ओटीपी जारी किया जाएगा।

वहीं अगर आप वन टाइम पासवर्ड की सुविधा का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो पहले की तरह आईटीआर की कॉपी साइन करके उसे बेंगलुरु ऑफिस भेज सकते हैं।

ऐसे मिलेगा ओटीपी नंबर

इंटरनेट बैंकिंग के जरिये कई सरकारी और निजी बैंकों ने वेरिफिकेशन की सुविधा नेट बैंकिंग के जरिये दी हुई है। नेट बैंकिंग लॉगइन करते ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का एक लिंक दिखाई देगा। इसके माध्यम से वन टाइम पासवर्ड जेनरेट किया जा सकता है।

लेकिन, एक बात का ध्यान रखना होगा कि अगर आपका पैन नंबर केवाईसी के दौरान बैंक ने मान्य कर लिया है, तभी आपको यह लिंक दिखाई देगा। एक बार पासवर्ड जेनरेट होने के बाद उसे रिटर्न वेरिफाई करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पासवर्ड केवल 72 घंटे के लिए वैध होता है।

इस समय अवधि में ही आपको रिटर्न फाइल करना होगा। इसके अलावा आधार कार्ड नंबर के जरिये इनकम टैक्स की वेबसाइट incometa&indiaefiling.gov.in पर जाकर भी पासवर्ड हासिल कर सकते हैं। वहीं रजिस्टर्ड ईमेल और मोबाइल के जरिये अपने मोबाइल नंबर या रजिस्टर्ड ईमेल आईडी के माध्यम से भी ओटीपी जेनरेट किया जा सकता है। यह माध्यम केवल तभी काम करेगा जब टैक्सपेयर की सालाना आय 5 लाख रुपये से कम हो और उसे रिफंड भी क्लेम न करना हो।
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ये है इनकम टैक्स स्लैब

- 2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं
- 2.5 लाख से 5 लाख तक 10 प्रतिशत
- 5 लाख से 10 लाख तक 20 प्रतिशत
- 10 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत
(नोट: अगर आपकी इनकम 2.70 लाख रुपये सालाना है तो 2000 रुपये बनने वाला टैक्स सरकार की ओर से माफ है।)

सीनियर सिटीजन के लिए
- 3 लाख तक कोई टैक्स नहीं (उससे अधिक होने पर उपरोक्त नियम लागू)

सुपर सीनियर सिटीजन के लिए
- 5 लाख तक कोई टैक्स नहीं (उससे अधिक होने पर उपरोक्त नियम लागू)
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