वापस की टिकट के पैसे भारत सरकार देने को तैयार है। इराक वाले अभी वापस भेजने को तैयार हैं, लेकिन अभी 168 भारतीय वापस लौटना नहीं चाहते।
इराक के बसरा स्पोर्ट सिटी में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में बंधक बनाए गए 168 युवक कंपनी से अपना तीन महीने का वेतन लेकर स्वदेश लौटेंगे। कंपनी ने बकाया वेतन के लिए युवकों को दो महीने का समय दिया है। कंपनी वेतन बंधक युवकों के खाते में डालेगी। यह भारत सरकार के दखल और भारतीय दूतावास द्वारा कंपनी के मालिकों से बातचीत के बाद ही संभव हो सका है। अब सभी युवकों ने स्वदेश लौटने की तैयारी शुरू कर दी है। सभी युवक बीस फरवरी तक भारत लौट आएंगे।
गांव जटाना के रुपिंदर पाल सिंह रुबी ने इराक से फोन पर बताया कि तीन दिन पहले नई दिल्ली स्थित दूतावास से एक अधिकारी इराक दूतावास पहुंचे थे। वहां से दूतावास के अधिकारी कंपनी में आए और उन्होंने बंधक बनाए गए सब युवकों से बातचीत की। सब युवकों ने उन्हें कह दिया कि उनका काफी वेतन कंपनी के पास बकाया है। वह उसे लिए बिना यहां से नहीं जाएंगे।
कंपनी मालिक वेतन देने पर राजी
रुबी ने बताया कि बंधक बनाए गए सभी युवकों ने दूतावास के अधिकारियों से कहा कि वह कर्ज लेकर यहां काम करने के लिए आए थे। अगर वेतन लिए बगैर स्वदेश लौटेंगे तो कर्जदार उन्हें तंग करेंगे। इस पर दूतावास के अधिकारियों ने कंपनी के मालिकों से बातचीत की। इसके बाद कंपनी मालिक वेतन देने पर राजी हो गए।
उन्होंने कहा कि दूतावास के अधिकारियों ने उन्हें कहा है कि वह छह फरवरी को सभी बंधकों को यहां से निकलवा लेंगे। कंपनी मालिक अभी उन्हें तीन महीने का वेतन देकर भेज देगा। रुबी ने कहा कि जब बाकी वेतन के बारे में दूतावास के अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह में कंपनी मालिक उनके पैसे उनके खाते में डाल देगा।
सब बंधक भारतीयों को स्वदेश भेजा जाएगा
रुबी ने कहा कि दूतावास के आश्वासन पर सब बंधक मान गए और स्वदेश लौटने के लिए तैयार हो गए। रुबी ने कहा कि अभी सब बंधकों के पासपोर्ट कंपनी अधिकारियों के पास ही हैं, जिसे दूतावास के अधिकारी ही ले सकेंगे। अभी तक तो उन्हें यहीं बताया गया है कि भारत सरकार के खर्च पर सब बंधक भारतीयों को स्वदेश भेजा जाएगा।
रुबी ने कहा कि दूतावास द्वारा दी गई इस खबर के बाद सभी बंधक काफी खुश हैं। सब लोगों ने अपने घर लौटने की तैयारी भी शुरू कर दी है। रुबी ने कहा कि अपने पैसों की खातिर काफी संघर्ष करना पड़ा। परिजनों को देखे हुए काफी समय हो चुका है। अब बस उनके दिल में परिजनों से मिलने की ही चाह है।