पंजाब प्रदेश भाजपा का अगला प्रधान कौन होगा, यह शनिवार को तय हो जाएगा। यह भी फाइनल हो जाएगा कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा, शिअद के साथ मिलकर लड़ेगी, या फिर अकेले ताल ठोंकेगी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इन दोनों अहम मुद्दों पर मंथन के लिए पंजाब के कोर ग्रुप और मंत्रियों की बैठक शनिवार को दिल्ली में बुलाई है।
बैठक में राष्ट्रीय संगठन मंत्री राम लाल और पंजाब प्रभारी प्रभात झा तो रहेंगे ही। दिलचस्प बात यह है कि बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली भी शामिल होंगे। बैठक के दौरान पंजाब के नेताओं से अलग-अलग बात कर इन दोनों मुद्दों पर फीडबैक लिया जाएगा।
उसके बाद हाईकमान दोनों मामलों पर फैसला लेगा। बैठक शाम पांच बजे शुरू होगी। माना जा रहा है कि शनिवार शाम या रविवार सुबह नए प्रदेश प्रधान का एलान कर दिया जाएगा।
इसे देखते हुए पंजाब के प्रमुख नेताओं ने दिल्ली में डेरा डाल लिया है और अपने-अपने पक्ष में लॉबिंग में लग गए हैं। विजय सांपला और पंजाब के संगठन मंत्री दिनेश कुमार वीरवार से ही दिल्ली में हैं, अन्य नेता शुक्रवार सुबह रवाना हो गए थे। केंद्रीय राजनीति में मौजूदा प्रधान कमल शर्मा की हिमायत अरुण जेटली कर रहे हैं।
यह भी माना जा रहा है कि कमल का दावा कमजोर न पड़ जाए, इसीलिए जेटली मीटिंग में शामिल हो रहे हैं। उधर, अश्वनी शर्मा को राम लाल, राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज का आशीर्वाद प्राप्त है।
प्रभात झा और दिनेश कुमार भी उनकेही पक्ष में हैं। प्रधानगी केलिए मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच है। इनकेअलावा अविनाश राय खन्ना भी दौड़ में हैं।
नौ लोग कमल, आठ अश्वनी के साथ
पंजाब से बैठक में शामिल होने वाले 17 लोगों में से नौ कमल शर्मा के पक्ष में हैं। इनमें कमल केअलावा तीक्षण सूद, जगतार सैनी, राकेश राठौर, तरुण चुघ, प्रो. राजिंदर भंडारी, अनिल जोशी, भगत चुन्नी लाल और गुरचरन कौर शामिल हैं। वहीं, आठ लोग अश्वनी शर्मा के साथ हैं।
इनमें अश्वनी के अलावा विजय सांपला, अविनाश राय खन्ना, मनोरंजन कालिया, बृजलाल रिणवा, मदन मोहन मित्तल, सुरजीत ज्याणी और दिनेश कुमार शामिल हैं। यह गुट अश्वनी की बात न बनती देख अविनाश राय खन्ना का नाम भी बढ़ा सकता है, क्योंकि यह किसी भी कीमत पर नहीं चाहता कि कमल प्रधान बने, लेकिन खन्ना के नाम पर मित्तल और दिनेश सहमत नहीं हैं।
मंत्रिमंडल में भी हो सकता है बदलाव
आम तौर पर ऐसे फैसलों के लिए हाईकमान सिर्फ कोर ग्रुप की बैठक बुलाता है, लेकिन इस बार मंत्रियों को भी बुलाया गया है। सुरजीत ज्याणी कोर ग्रुप के मेंबर नहीं हैं, इसकेबावजूद उन्हें बुलाया गया है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रिमंडल में भी बदलाव हो सकता है।
सिद्धू पर भी विचार संभव
शनिवार को दिल्ली में होने वाली बैठक के दौरान इस बात पर भी फीडबैक लिया जाएगा कि पार्टी को अगला विधानसभा चुनाव शिअद के साथ लड़ना चाहिए या अकेले। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अगर तो लगभग आधे-आधे लोग इसके पक्ष और विपक्ष में रहे तो प्रधानगी का एलान कर पार्टी गठबंधन में ही लड़ेगी, लेकिन अगर ज्यादातर लोगों ने कहा कि अकेले लड़ना चाहिए, तो प्रधानगी का एलान टल सकता है। अकेले लड़ने की स्थिति में पार्टी नवजोत सिद्धू को प्रधान बनाने पर विचार कर सकती है।