चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने एससी-एसटी के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए अलग से छात्रावास बनाने के लिए रकम भेजी, लेकिन पीयू के जिम्मेदारों ने यह रकम दूसरे छात्रावासों पर खर्च दी। एक नहीं तीन-तीन छात्रावासों को पीयू में मंजूरी मिली थी। पीयू का इस पर तर्क है कि छात्रों में भेदभाव न हो, इसलिए यह रकम दूसरे छात्रावासों पर खर्च की गई। सभी छात्रावासों में एससी-एसटी विंग हैं। पीयू के जवाब के बाद जानकारों ने सवाल उठाया है कि क्या केंद्र सरकार ने छात्रावास इसलिए मंजूर किया था कि छात्रों के बीच भेदभाव हो या फिर उनकी सुविधा के लिए था।
पंजाब यूनिवर्सिटी में यूजीसी की ओर से एससी-एसटी छात्रावास बनाने के लिए मंजूरी मिली। दो करोड़ रुपये से अधिक रकम दी गई। लगभग 300 विद्यार्थियों के रहने के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी। इस रकम से अलग से छात्रावास बनाने की बजाए अन्य छात्रावासों पर खर्च दी गई। इसके बाद तकनीकी शिक्षा पा रहे विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास और मंजूर हुए। वह भी धरातल पर कहीं नहीं दिखे जबकि पीयू में लगाए गए नक्शों में अलग से एससी-एसटी छात्रावास दर्शाया गया है।
ये है पीयू की थ्योरी
कोई भी योजना सरकार शुरू करती है तो उस योजना को बनाने के लिए कई आईएएस व विशेषज्ञों की टीम जुटती है। नुकसान-फायदा हर चीज देखी जाती है। इसी को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए भी अलग से छात्रावास पीयू में बनाने के लिए रकम को मंजूरी दी, लेकिन पीयू के जिम्मेदारों ने यह नकार दिया। उनका कहना है कि अलग से छात्रावास इस वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बनेगा तो भेदभाव बढ़ेगा। ऐसे में अलग छात्रावास नहीं बनाएंगे। बने छात्रावासों में ही विद्यार्थियों को प्रवेश दे देंगे। जानकारों का कहना है कि पीयू ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया। साथ ही एक बड़े वर्ग के विद्यार्थियों को उस लाभ से वंचित कर दिया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि क्या इस वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बनने वाली योजनाएं सरकार बंद कर दे। क्या पीयू ने सरकार को अवगत कराया कि इस छात्रावास के लिए आई रकम को इसलिए दूसरे छात्रावास पर खर्च कर दिया। तमाम सवाल उठ रहे हैं, जिसको को लेकर पीयू कटघरे में है।
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छात्रों से भेदभाव न हो, इसलिए अलग से एससी-एसटी छात्रावास नहीं बनाया गया। अन्य छात्रावासों में एससी-एसटी विंग है। इस वर्ग से आने वाले हर विद्यार्थी को दाखिला दिया जाता है।
-- प्रो. एसके तोमर, डीएसडब्ल्यू