गोदामों से 12 हजार करोड़ का गेहूं गायब होने के विवाद में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों ने मीडिया से रूबरू होकर सफाई दी। मीडिया के सामने आने से गुरेज करने वाले कैरों ने आंकड़ों समेत सफाई देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से विवादित राशि को स्टाक गायब होने से नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने यहां एक प्रेस कांफ्रेंस करके स्पष्ट किया कि मंडियों से गेहूं सीधे एफसीआई के गोदामों में जाता है और इसकी राशि सीधे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में जाती है और आढ़तियों के बिल के एवज में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन के माध्यम से बैंक ही उनके खातों में राशि डालता है। मंडियों से किस आढ़तिए ने कब और कितना खाद्यान गोदाम में भेजा, इसकी मुकम्मल जानकारी तुरंत वेबसाईट पर डाली जाती है।
इन तथ्यों के साथ कैरों ने कहा कि इसी प्रक्रिया के तहत धान की फसल मंडियों से सीधे 3200 शैलर मालिकों को भेजी जाती है। शैलरों को अलाट की धान का 67 प्रतिशत चावल तैयार करके सीधे एफसीआई को भेजा जाता है और इसकी अदायगी भी ऑन लाइन होती है। इस पूरी प्रक्रिया की बकायदा मॉनीटरिंग होती है और बैंक ऑडिटींग करते हैं। मंत्री ने कहा कि स्टाक गायब होने का सवाल ही पैदा नहीं होता और अदायगी में भी राज्य सरकार का कोई हाथ नहीं है। कैरों ने कहा है कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अनाज खरीदने के लिए केंद्र सरकार को अंदाजन राशि (सीसीएल) की जानकारी देता है। इस राशि से फसल खरीद की जाती है, लेकिन फसल खरीदने के अलावा ट्रांस्पोर्टेशन, आढ़तियों की कमिशन, टैक्स, मजदूरी आदि का खर्च भी होता है।
इस अतिरिक्त खर्च पर केंद्र सरकार वर्ष 2003 से किंतु परंतु करती आ रही थी। इसी विवाद के कारण उस वक्त केंद्र सरकार से 8713 करोड़ रुपए रुके थे, लेकिन 13 सालों में इस मूल राशि पर 18074 करोड़ का ब्याज बन गया और विवादित राशि के निपटारे के संबंध में आरबीआई ने एसबीआई को वसूली करने के लिए पत्र लिखा। इसी विवादित राशि के बारे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इतनी राशि का स्टाक गायब हो गया। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले साल गेहूं का सवा लाख टन का स्टाक अभी एफसीआई को देना है। वह भी भंडारन की समस्या की वजह से नहीं दिया जा सका था।
पीएमओ ने बनाई कमेटी, 4300 करोड़ जारी
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार ने कुल 26 हजार 187 करोड़ रुपए पंजाब सरकार को देने हैं। पिछले 13 सालों से चले आ रहे इस विवाद को निपटाने के लिए केंद्र से बात की गई तो पीएम ने केंद्र सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें संयुक्त सचिव बैंकिंग भी शामिल हैं। कमेटी ने अब मान लिया है कि पंजाब सरकार ट्रांस्पोर्टेशन, टैक्स, आढ़तियों की कमिशन व मजदूरी आदि की राशि लेने की हकदार है। कमेटी की इस समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने 4300 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं।
कैरों ने कहा है कि इस विषय पर केंद्र सरकार से निरंतर बैठकें चल रही हैं और शेष राशि भी जल्द ले ली जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले सालों में केंद्र सरकार चालू साल की सीसीएल राशि को पिछले बकाए में एडजस्ट करती आई थी, लेकिन अब व्यवस्था कायम की गई है कि जिस वर्ष के लिए अंदाजन राशि जारी होगी, इस राशि से उसी वर्ष का भुगतान किया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार जिस बयाज दर पर सीसीएल देती है, उसके उल्ट विवादित राशि पर अधिक ब्याज वसूलती रही, यह भी पंजाब सरकार पर कर्ज बढ़ने का अन्य कारण रहा।