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नवजोत सिद्धू कांग्रेस में रहेंगे या भाजपा से होगी सुलह? पंजाब में तेज हुईं राजनीतिक अटकलें

Sun, 21 Jul 2019 10:06 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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नवजोत सिंह सिद्धू (फाइल फोटो)
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इस्तीफा मंजूर होने के साथ ही सियासी हलकों में सिद्धू के सियासी भविष्य को लेकर कई सवाल और कई कयास शुरू हो गए हैं। मुख्यमंत्री से नाराज और पार्टी आलाकमान के सामने कोई सुनवाई भी नहीं होने से आहत नवजोत सिद्धू क्या अब कांग्रेस को भी अलविदा कहेंगे? आम आदमी पार्टी और प्रदेश के छोटे-छोटे दलों की ओर से मिले न्योते को स्वीकार कर क्या सिद्धू राज्य में तीसरा फ्रंट खड़ा करेंगे? क्या सिद्धू की भाजपा से फिर सुलह हो सकती है? लंबे समय से खामोशी साधे हुए सिद्धू का सियासी करियर क्या अब हाशिए पर चला जाएगा? ऐसे में पंजाब के राजनीतिक गलियारों में सिद्धू चर्चा का विषय बने रहे।

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वर्ष 2017 में कांग्रेस में आने से पहले सिद्धू को आम आदमी पार्टी ने पेशकश की थी। लेकिन सिद्धू मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, जिसे आप ने स्वीकार नहीं किया। इससे पहले भाजपा ने भी उनकी महत्वाकांक्षा को भांपते हुए उन्हें पार्टी में लगभग किनारे ही कर दिया था, जिससे आहत होकर उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ा था।

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नवजोत सिंह सिद्धू(फाइल फोटो) - फोटो : ANI
सिद्धू की यही महत्वाकांक्षा कांग्रेस सरकार का हिस्सा बनने के बाद भी कमजोर नहीं पड़ी और वे पंजाब में कैप्टन के बराबरी का दर्जा कांग्रेस से चाहते रहे हैं। दूसरी ओर, कैप्टन और सिद्धू की राजनीति पर नजर डाली जाए तो कैप्टन जहां आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

वहीं सिद्धू अपने सियासी करियर के दौरान कभी भी किसी जनआंदोलन को शुरू करने या उसका हिस्सा बने हुए दिखाई नहीं दिए। वे भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में स्टार चेहरे के रूप में चर्चा में रहे हैं। कांग्रेस ने भी लोकसभा चुनाव में सिद्धू के स्टार चेहरे का उपयोग किया, हालांकि पार्टी के चुनाव में प्रदर्शन ने सिद्धू की स्थिति भी कमजोर की। 

अब पंजाब के छोटे-छोटे दलों जिनमें आम आदमी पार्टी से अलग हुए विधायक भी शामिल हैं, ने सिद्धू को न्योता दिया है। माना जा रहा है कि सिद्धू मंत्री पद छोड़ने के बाद फिलहाल कांग्रेस में ही बने रहेंगे।
 
इसका एक मुख्य कारण यह भी है कि वे आज भी राहुल गांधी के चहेते हैं और प्रदेश कांग्रेस में यह सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि पार्टी आलाकमान सिद्धू को राष्ट्रीय राजनीति में स्टार चेहरे के रूप में स्थापित करेगी। हालांकि सिद्धू पंजाब में ही अपना सियासी आधार बनाना चाहते हैं लेकिन कैप्टन के साथ उनकी सुलह होने के भी कोई आसार नहीं हैं।
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