चंडीगढ़। नया साल क्या गुल खिलाएगा, आदमी आज भी रोटी खाता है कल भी रोटी ही खाएगा... जैसे ही डॉ. अनीश गर्ग ने अपनी रचना सुनाई सभी ने तालियों से उनका स्वागत किया। मौका था कम्युनिटी सेंटर सेक्टर-43 के सभागार में वीरवार को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के 32 कवियों ने काव्यगोष्ठी का आयोजन का। कवियों ने काव्य पाठ से वर्ष 2022 को विदाई दी। संवाद साहित्य मंच, आचार्यकुल चंडीगढ़ और वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की ओर से किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में अमेरिका से आईं कवियित्री सुषमा मल्होत्रा ने शिरकत की। अध्यक्ष मंडल में पार्षद प्रेमलता, केके शारदा, प्रेम विज और सौभाग्यवर्धन शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अश्विनी शांडिल्य ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत कवि प्रेम विज ने सिर्फ साल बदला है, लेकिन दिन और महीने नहीं... सुनाकर की। कैलाश आहलुवालिया ने तीन दिन का अबोला, घर में जैसे कर्फ्यू, बोलचाल पर पाबंदी, मतलब की बात.. सुनाकर वाहवाही लूटी। डॉ. विनोद शर्मा ने सुख-दुख होते मानव के बोए बीज, कोई रहे सीमा में कोई लांघे दहलीज.. सुनाकर सबका दिल जीत लिया। कवयित्री अलका कांसरा ने हवाओं से पूछते हो क्या कभी, किधर को उड़ी जा रही है...सुनाकर समा बांध दिया। इनके अलावा गुरदीप गुल, सुशील हसरत नरेलवी, सोमेश, शशि प्रभा, प्रेम विज, डॉ. विनोद शर्मा, अलका कांसरा, कैलाश आहलूवालिया, बीके गुप्ता, सौभाग्य वर्धन, हरेन्द्र सिन्हा, अश्विनी शांडिल्य, अशोक नादिर, नीलम त्रिखा, अनीश गर्ग आदि ने भी नववर्ष, सामाजिक मुद्दों पर गीत, गजल व कविताएं पेश कर खूब तालियां बटोरीं।