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'लड्डू बांटने गई थी..पीड़ित बच्चे की जानकारी नहीं थी, यह साजिश है'

Mon, 06 Feb 2017 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आशा जसवाल - फोटो : अमर उजाला
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मेयर द्वारा स्नेहालय में जाकर दुष्कर्म पीड़ित बच्चे से मुलाकात करने पर समाज कल्याण विभाग की तरफ से केस दर्ज कराया गया है। इस पर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है। इस मामले में रविवार को अमर उजाला ने मेयर आशा जसवाल से बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश:  
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सवाल: आप स्नेहालय में पीड़ित बच्चे को क्यों मिलने गईं?
मेयर- स्नेहालय जाने से पहले मुझे तो पीड़ित बच्चे की कोई जानकारी भी नहीं थी। गणतंत्र दिवस पर बच्चों को लडडू बांटने थे लेकिन उस दिन वह नहीं जा सकी थीं। इसलिए वीरवार को वह स्नेहालय के बच्चों को लडडू बांटने के लिए गईं। जब वहां पर गईं तो एक मीडियाकर्मी ने पीड़ित बच्चे की जानकारी दी। उसके बाद उस बच्चे के बारे में स्नेहालय के स्टाफ से पूछा तो पता चला कि उसको अकेले कमरे को रखा गया है। ऐसे में उन्होनें स्टाफ को भी कहा कि बच्चें को अकेले नहीं रखना चाहिए, उसकी काउसलिंग होनी चाहिए। जब वह पहुंची तो मीडिया पहले से मौजूद था।
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'जबरन घुसने का आरोप गलत'

मेयर आशा जसवाल - फोटो : अमर उजाला
सवाल:  आरोप है कि आपने स्नेहालय में जबरन घुसने का प्रयास किया?
जवाब - यह बिल्कुल गलत आरोप है। स्नेहालय में जाने से पहले बाकायदा वार्ड पार्षद राजेश कालिया ने एक दिन पहले समय लिया था। वीरवार को पहले 11 बजे और बाद में तीन बजे का समय स्नेहालय से ही मिला। मैं अपनी सरकारी कार में स्नेहालय गई थी, जहां पर कर्मचारियों ने हमारा स्वागत भी किया। उन्हें एक घंटे तक बच्चों से नहीं मिलने दिया गया। इसके बाद वह वापस जाने के लिए अपनी सरकारी गाड़ी में  बैठ गई तभी स्टाफ उनके पास आया और भीतर लेकर गया। यहां तक कि उन्हें बच्चों को दिया जाने वाला खाना भी खिलाया गया। ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि वह जबरन स्नेहालय में घुसीं।

सवाल- आपको क्या लगता है क्यों मामला दर्ज किया गया?
जबाव- उन्होंने स्नेहालय में कई बच्चों से बात की गई। बच्चों ने कई समस्याएं भी बताई थीं। जिस पर उन्होंने स्नेहालय के स्टाफ को कहा भी था। उनके खिलाफ एक सोची समझी साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया है। समाज कल्याण विभाग की निदेशक ने भी शिकायत दर्ज करवाने से पहले उनसे बात नहीं की। पुलिस ने भी उनका पक्ष जाने बिना ही मामला दर्ज कर लिया। अब आरोप लगाया जा रहा है उन्होंने हाथोपाई की, जो सरासर गलत है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अफसरशाही अपनी खामियों को छुपाने के लिए जनप्रतिनिधियों पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। सिर्फ अधिकारियों ने अपनी स्किन सेव करने के लिए झूठा मामला दर्ज कराया है। जिस अधिकारी ने पुलिस को शिकायत दी है वह तो स्नेहालय में मौजूद तक नहीं थी। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि रविवार शाम तक उन्हें एफआईआर की प्रति तक नहीं दी गई। ऐसा करके सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला किया गया है।
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