बता दें कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली और हरियाणा सरकार ने भी मास्क की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। हालांकि प्रशासन लोगों को परामर्श जारी करके भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क लगाने के लिए कहता रहेगा। कोरोना संक्रमण के कारण यूटी प्रशासन ने अप्रैल 2020 में मास्क पहनने व अन्य कई पाबंदियां लगाई थीं। नाइट कर्फ्यू भी लागू कर दिया गया था। स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया था। इसके अलावा कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम कर दिया गया था।
मास्क नहीं पहनने पर एक हजार रुपये का कटता था चालान
शहर में मास्क नहीं पहनने पर 1000 रुपये का चालान कटता था। ये चालान यूटी प्रशासन, एसडीएस और पुलिस की टीमें मिलकर करती थीं। इन टीमों की तरफ से शहर की विभिन्न मार्केटों में अभियान चलाए जाते थे और चालान काटे जाते थे। कोरोना की तीनों लहर में जब-जब कोरोना के केस बढ़े, प्रशासन ने मास्क नहीं पहनने वालों पर सख्ती की लेकिन तीसरी लहर के बाद जैसे ही कोरोना के मामलों में कमी आई, चालान की संख्या भी बहुत कम हो गई। इन दिनों कोरोना के केस नाम मात्र हैं, इसलिए चालान भी नहीं हो रहे थे।
प्रशासन ने हमें सहूलियत दी है। ऐसे में अब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों और सामूहिक आयोजन वाले स्थान पर जाते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। इससे आने वाली संभावित लहर से बचाव भी संभव होगा। गंभीर रूप से बीमार लोगों को अब भी सजग रहने की जरूरत है। यह बात ठीक से समझना होगा कि मास्क का इस्तेमाल हम अपनी सुरक्षा के लिए कर रहे हैं। - डॉ. रविन्द्र खैवाल, पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग
शहर में कोरोना का संक्रमण अब न के बराबर है इसलिए लोगों के लिए मास्क पहनना अब वैकल्पिक होगा। चालान नहीं काटा जाएगा। मैंने आदेश जारी कर दिया है। हालांकि हम लोगों को सलाह देंगे कि वह मास्क पहनें। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक