फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैगी के बाद हुई पानी की जांच, कुछ मिलावटी तो कुछ साफ

Sat, 06 Jun 2015 10:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
मैगी में मिलावट की खबरों के बीच चंडीगढ़ के लोगों के लिए एक अच्छी खबर आई है। चंडीगढ़ का पानी पूरी तरह शुद्ध है। 80 अलग-अलग इलाकों से लिए गए सैंपल में एक भी हैवी मेटल नहीं मिला है। खास तौर पर लेड, आयरन, आर्सेनिक और निकिल की मात्रा ब्यूरो आफ स्टैंडर्ड-2012 के मानक से कम मिली है।
विज्ञापन


हालांकि, कुछ हैंडपंप के पानी में कठोरता है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। पानी में हैवी मेटल्स होने से नर्वस सिस्टम, लिवर, किडनी और कैंसर का खतरा रहता है। यह खुलासा पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ की स्टडी में हुआ है। इस स्टडी में स्कॉलर डा. अनूप यादव, डा. रविंद्रा खैवाल व डा. सुमन मोर शामिल थीं।

पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया कि आसपास के प्रदेशों के पानी में काफी मात्रा में हैवी मेटल मिल रहे थे। वहीं, इंडस्ट्रियल एरिया व गार्बेज प्लांट के पास स्थित इलाकों के पानी के प्रदूषित होने के भी काफी चांस रहते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए शहर के 13 इलाकों से 80 सैंपल भरे गए। इनमें 59 सैंपल बोरवेल से भरे गए, जबकि 21 हैंडपंप व प्राइवेट कनेक्शन से लिए गए। ये सैंपल नवंबर 2014 से लेकर फरवरी 2015 के बीच भरे गए थे।
विज्ञापन

ये रहे पानी के सर्वे के रिजल्ट

तत्व------लिमिट---------मिला
लेड-------0.01----------.001
आयरन----0.30-----------.34
आर्सेनिक--.01------------.001
निकिल----0.02-----------.001
(मात्रा मिलीग्राम/प्रति लीटर में हैं। )

रसायन भी जांचे
पानी में मौजूद रसायनों की भी जांच की गई। टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड, नाइट्रेट, सल्फेट, कठोरता, क्लोराइड और सोडियम पोटेशियम की मात्रा भी ठीक पाई गई है।

कुछ में मिली मिलावट
स्टडी बताती है कि पानी के कुल 11.2 प्रतिशत सैंपल में बायोलाजिकल एजेंट मिले हैं। ये उन जगहों के सैंपल हैं, जहां हैंडपंप 50-70 फुट पर लगाए गए थे। जबकि 100 से 1200 फुट पर लगे ट्यूबवेल व हैंडपंप के सैंपल पूरी तरह से सुरक्षित मिले हैं।

यहां से लिए थे सैंपल
धनास, खुड्डा लहौरा, कैंबवाला, खुड्डा जस्सू, सारंगपुर, किशनगढ़, मौलीजागरां, मक्खन माजरा, बुड़ैल, मलौया, डड्डूमाजरा और रायपुरकलां से सैंपल लिए गए थे।
विज्ञापन

मैगी का स्टॉक उठा भुगतान करें व्यापारी

मैगी में हानिकारक तत्व पाए जाने के बाद सेक्टर-17 ट्रेडर्स एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल डीसी एसबी दीपक से मिला। व्यापारियों ने डीसी को ज्ञापन देकर मांग उठाई कि जो दुकानों में मैगी का स्टॉक पड़ा है, उसे उठाकर दुकानदारों को उसकी राशि का भुगतान किया जाए। इस प्रतिनिधिमंडल में कमलजीत पंछी, एलसी अरोड़ा सहित अन्य मौजूद थे।

सभी नूडल्स की सेल गिरी
बाजारों में मैगी की सेल पूरी तरह से ठप हो गई है। विक्रेताओं ने दुकान से माल उठाकर गोदामों में रख दिया है। मैगी के साथ-साथ दूसरी कंपनियों के नूडल्स भी नहीं बिक रहे हैं। दुकानों में इस समय लाखों रुपये का मैगी का स्टाक पड़ा है।

सेक्टर-23 के बत्तरा करियाना स्टोर के संचालक दीपक बत्तरा का कहना है कि अब तो लोग अपने घरों में बचे मैगी के पैकेट भी वापस करने आ रहे हैं। दुकानदार खुद भी मैगी नहीं बेच रहे हैं। हर दुकानदार रोजाना 100 से 200 पैकेट परचून में मैगी बेचता था जो अब नहीं बिक रहे हैं।

पैक्ड फूड के सैंपल लेने के निर्देश
मैगी में मिलावट मिलने के बाद चंडीगढ़ का स्वास्थ्य विभाग एक्टिव हो गया है। शुक्रवार को मीटिंग में चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने फूड सेफ्टी विंग के अधिकारियों को पैक्ड फूड के रैंडम सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं।

उन्हें आदेश दिया गया है कि वे ज्यादा से ज्यादा सैंपलों की जांच कर खाद्य पदार्थों के मानकों को चेक करें। इस सीजन में हैजा और डायरिया फैलने के ज्यादा चांस रहते हैं, इसलिए सुनिश्चित करें कि कोई भी कटे फल न बेचे। इसके लिए भी अभियान चलाया जाए। इसके अलावा ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें