अभी गर्मी का मौसम शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन शहर में पीने वाले पानी का संकट गहरा गया है। मंगलवार को हाउस की मीटिंग में यह मामला पार्षदों ने जोरशोर से उठाया था।
वहीं, बुधवार को एडीसी विकास भूपिंदर सिंह की अगुवाई में जिला स्तरीय वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन कमेटी की मीटिंग में यह मामला उठाया गया। इस दौरान अधिकारियों ने कमेटी की मांग को संबंधित विभाग को भेजने के आदेश दिए है।
जानकारी के मुताबिक, पानी के संकट की सबसे ज्यादा समस्या फेज-1 से 7 तक के लोगों को उठानी पड़ रही है।
फेज-एक, दो, चार और पांच में तो हालात ऐसे है कि थर्ड फ्लोर तो दूर फर्स्ट फ्लोर पर भी पानी नहीं चढ़ता है। इसी तरह फेज-7 में पंप खराब होने के चलते भी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा फेज-5 वाले भी काफी समय से इलाके में बूस्टर लगाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, अभी तक यह मामला सिरे नहीं चढ़ पाया है। जिक्रयोग है कि शहर को 13 एमजीडी पानी की जरूरत है। लेकिन ट्यूबवेल व अन्य सुविधाओं के चलते केवल दस एमजीडी पानी मिल पा रहा है।
करोड़ों आने पर भी नहीं शुरू हुआ काम
जानकारी के मुताबिक, निगम को वाटर सप्लाई को अपग्रेड करने के लिए 26.18 करोड़ की ग्रांट मिल चुकी है। लेकिन, अभी तक भी इस दिशा में काम शुरू नही हो पाया है। इलाके के लोग लंबे समय से इसकी परेशानी उठानी पड़ रही है। पार्षद अरुण शर्मा का कहना है कि वह हाउस की मीटिंग में पानी के मुद्दे को उठा चुके हैं। लेकिन, अभी तक निगम इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
गंदे पानी की सप्लाई का मुद्दा उठाया
मोहाली विकास मंच के प्रधान विनीत वर्मा ने बताया कि उन्होंने एडीसी हुई मीटिंग में पानी के संकट समेत कई मुद्दों को उठाया है। उन्होंने बताया कि इसमें गंदे पानी की सप्लाई, लो प्रेशर जैसे तमाम चीजें शामिल हैं। वहीं, कजौली से आने वाले पानी की स्थिति भी साफ नहीं है। ऐसे में विभाग से उनकी एक ही अपील है कि लोगों का ख्याल रखा जाए। पानी के मामले को गंभीरता से लिया जाए। इससे लोगों की सेहत भी जुड़ी है।