पानी बर्बाद करने वालो के खिलाफ कार्रवाई करने वाली टीमें उत्तरी क्षेत्र के वीआईपी सेक्टरों के वीआईपीज पर मेहरबान है। जबकि इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा पानी का प्रयोग किया जाता है। नगर निगम अभी तक 30 पानी बर्बाद करने वालों के चालान काट चुका है, लेकिन उत्तरी सेक्टरों से एक भी चालान नहीं है।
यह तब है जब उत्तरी क्षेत्र के सेक्टरों (सेक्टर-1 से 11 तक) के लोग अपने बागों के लिए साफ पानी का ही इस्तेमाल सिंचाई के लिए करते हैं। नगर निगम ने 15 अप्रैल से शहर में पानी बर्बाद करने पर पाबंदी लगाई गई है। पाइप लगाकर कार धोने पर भी पाबंदी है। इसके बावजूद वीआईपी सेक्टराें में कारें धोने का सिलसिला जारी है। लेकिन नगर निगम की टीमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम हैं।
सेक्टर-11 से 16 तक के एरिया में कई वीआईपी रहते हैं, इन सेक्टरों में भी कोई चालान नहीं काटा गया है। मेयर अरुण सूद का कहना है कि पानी बर्बाद करने वालों पर कार्रवाई को लेकर कोई भेदभाव न हो इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग को जल्द निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
सबसे ज्यादा चालान सेक्टर-19 में: सबसे ज्यादा चालान सेक्टर-19 में काटे गए हैं। यहां पर 7 चालान काटे गए हैं। एक चालान पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। जबकि सेक्टर-25 में तीन, सेक्टर-24,30,32,33,39,40,धनास और मनीमाजरा के एनएसी एरिया में एक एक चालान पानी बर्बाद करने का काटा गया है।
पानी के लीकेज पर भी चालान: अगर किसी के घर के आगे पानी की लीकेज हो रही है या फिर मीटर में से पानी बह रहा है या फिर कूलर से पानी बहेगा तो भी दो हजार रुपये का चालान काटा जाएगा। अगर कोई जुर्माने की राशि अदा नहीं करेगा तो पानी के बिल में यह राशि जुड़कर आ जाएगी। अगर कोई बाल्टी में से कम पानी का प्रयोग करके गाड़ी साफ करता है या फिर सिंचाई करता है तो उस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
टर्शरी वाटर का प्रयोग नहीं करते वीआईपी सेक्टर
नार्थ के वीआईपी सेक्टर में सबसे ज्यादा पानी की खपत होती है, जबकि यहां पर दक्षिणी के मुकाबले जनसंख्या भी कम है। वीआईपी सेक्टर में प्रति व्यक्ति की प्रति दिन पानी की खपत दक्षिणी सेक्टर और गांवों के मुकाबले में कई गुना है। जबकि नेशनल नार्म्स के अनुसार प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी मिलना चाहिए।
उत्तरी सेक्टरों में लोग अपने बगीचों की सिंचाई से करते हैं, जबकि नगर निगम की ओर से नॉमिनल रेट पर टर्शरी वाटर दिया जा रहा है। लेकिन लोग टर्शरी वाटर का प्रयोग नहीं करते हैं। नगर निगम की ओर से टर्शरी वाटर के प्रोजेक्ट के लिए 15 करोड़ की राशि खर्च की है। नए बॉयलाज में एक कनाल से लेकर ऊपर तक की कोठियों में टर्शरी वाटर का कनेक्शन लेना जरूरी कर दिया। बॉयलाज लागू है लेकिन नगर निगम ने अभी किसी पर कार्रवाई नहीं की है।
पानी की किल्लत हो गई है शुरू: गरमी बढ़ने के साथ शहर में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। गरमी में शहर में पानी की मांग 116 एमजीडी पानी की हो जाती है। इस समय शहर को कजौली वाटर वर्क्स से 58 एमजीडी पानी मिल रहा है, जबक शहर में लगे 235 टयूबवेल से 22 एमजीडी पानी मिल रहा है। जिनमे से 10 प्रतिशत टयूबवेलों में हर दिन कोई न कोई दिक्कत ही रहती है। ऐसे में इस समय शहरं में 36 एमजीडी पानी की शार्टज हो रही है। ऊपर की मंजिलों में लो प्रैशर की दिक्कत शुरू हो गई है।