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आम सहमति से बलजिंदर सिंह बिट्टू एक बार फिर बने फासवेक चेयरमैन

Sun, 24 Apr 2016 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फासवेक चुनाव के विजेता - फोटो : amar ujala
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रविवार को फासवेक के चुनाव की घोषणा होनी थी। लेकिन बलजिंदर सिंह बिट्टू को सेक्टर-36 में आयोजित जनरल हाउस की मीटिंग में सर्वसम्मति से फिर से फासवेक का चेयरमैन चुन लिया गया। जबकि फासवेक के पूर्व चेयरमैन पीसी सांघी ने अपनाई गई इस प्रक्रिया का विरोध किया है। सांघी ने कहा कि जब बिट्टू को पता था कि समर्थन उनके साथ है तो फिर चुनाव से घबराने की क्या जरूरत थी।
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उन्हें पूरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी। बिट्टू पिछले दो साल से चेयरमैन पद पर थे। अब कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें फिर से चेयरमैन चुन लिया गया है। इसके साथ ही हाउस की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बाकी की कार्यकारिणी का गठित करने का अधिकार भी बिट्टू को ही दिया है। जनरल हाउस में करीब 233 आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने भाग लिया। जबकि कुल मतदाता 377 हैं। सर्वसम्मति से पहले जीएस साथी को मुख्य चुनाव अधिकारी भी नियुक्त किया था। लेकिन बाद में सर्वसम्मति से फैसला करने का निर्णय लिया गया। फासवेक के तहत इस समय 72 आरडब्ल्यूए हैं।

जनरल हाउस की बैठक में चुनाव की तारीख की घोषणा होनी थी। लेकिन कई पदाधिकारियों ने एकता दिखाते हुए बिट्टू को फिर से चेयरमैन चुनने का प्रस्ताव रखा। जिसे सर्वसम्मति से मान लिया गया। इस हाउस में बलजिंदर सिंह ने पिछले दो साल के कार्यकाल में अपनी उपलब्धियां गिनाईं। फिर से चेयरमैन बनने के बाद बिट्टू ने कहा कि रेजिडेंट्स का उन्हें भरपूर समर्थन मिला है।
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उनका कहना है कि अगले दो साल भी वह पहले की तरह काम करते रहेंगे। सेक्टर वाइज सभी की समस्याएं दूर की जाएंगी। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशंस को मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे। प्रशासन पर दबाव डाला जाएगा कि कोई भी विभाग अगर कोई नीति बनाए तो रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशंस से राय ली जाएगी। प्रशासन को कमेटियों का गठन कर उसमें रेजिडेंट्स को भी शामिल करना चाहिए। बिट्टू का कहना है कि वह काम करने में विश्वास करते हैं। अगले दो साल में सभी आरडब्ल्यूए को लेकर करते रहेंगे। 

फासवेक के पूर्व चेयरमैन पीसी सांघी का कहना है कि जिस प्रक्रिया से फिर से बिट्ट को चुना गया है, वह अवैध है। जनरल हाउस की बैठक में चुनाव की तारीख घोषित की जानी थी। उनका कहना है कि चेयरमैन के अलावा वाइस चेयरमैन, महासचिव और सचिव निर्वाचित पद हैं, ऐसे में उनके लिए हाउस में कोई निर्णय नहीं हुआ। चेयरमैन को इन निर्वाचित पदों पर किसी को मनोनीत करने का अधिकार नहीं है।

सांघी का कहना है कि चुनाव इसलिए नहीं कराया गया क्योंकि इसके नामांकन भरने के लिए जो परफोर्मा तय है, उसमें शैक्षिक योग्यता और आपराधिक रिकॉर्ड बताना होता है। इसी से बचने के लिए बिट्टू ने यह घोषणा करवा दी। 
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