प्रदेश में फसल बर्बादी की असली तस्वीर अब सामने आ रही है। किसान खेतों में फसल निकालने पहुंच रहे हैं, लेकिन कर्ज लेकर बोई गई फसल में से जब दाने नहीं निकल रहे हैं तो यह सदमा वे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
पानीपत, कैथल, रोहतक व भिवानी जिले में बुधवार रात और बृहस्पतिवार को पांच और किसानों की मौत हो गई। इनमें से दो ने आत्महत्या की और तीन को हार्ट अटैक आ गया। इस तरह प्रदेश में अब तक 32 किसान जान गंवा चुके हैं।
रोहतक जिले की कलानौर तहसील के गुढ़ान गांव में 28 वर्षीय किसान सोमबीर ने खराब फसल व कर्ज से तंग आकर आत्महत्या कर ली। सोमबीर के पास महज ढाई एकड़ जमीन थी जबकि करीब 12 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर अपने भाई के साथ खेतीबाड़ी का कार्य करता था। परिजनों ने बताया कि खराब फसल को लेकर सोमबीर पिछले दो-तीन दिन से तनाव में था और बुधवार शाम खेत में जाकर जहर खा लिया। घर आते ही उसकी हालत बिगड़ी तो परिजन अस्पताल ले गए, लेकिन रास्ते में उसका दम टूट गया।
मुआवजा न मिलने से परेशान किसान कुएं में कूदा
लोहारू। पाजू गांव में बृहस्तपतिवार को एक किसान ने मुआवजा नहीं मिलने से परेशान होकर कुएं में कूदकर जान दे दी। जानकारी के अनुसार किसान सुरेन्द्र पुत्र सरदारा पिछले साल सूखे से नष्ट हुई फसल का बकाया मुआवजा न मिलने से परेशान था और दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुका था। परिजनों का कहना है कि इस बार भी बारिश की मार से सुरेन्द्र की फसल खराब हो गई थी। ऐसे में वह कई दिन से तनाव में था और कुएं में कूद कर जान दे दी।
सह नहीं सके फसल बर्बादी का सदमा
कैथल जिले के राजौंद क्षेत्र के गांव रोहेड़ा में 48 वर्षीय किसान गजे सिंह को दिल का दौरा पड़ा और उसकी खेत में ही मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि गजे सिंह ने कुछ समय पहले कर्ज लेकर दो ट्यूबवैल लगाए थे, जो कामयाब नहीं हुए। ऐसे में ठेक पर जमीन लेकर गेहूं बिजाई की, जो बर्बाद हो गई। इसका सदमा वह सह नहीं सका।
इसी प्रकार ढांड हलके के गांव पबनावा निवासी राजकुमार खेत में गेहूं कटाई कर रहा था और इसी बीच उसके सीने में दर्द हुआ। परिजन अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि राजकुमार ने आढ़ती से कर्ज लेकर सवा 2 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर गेहूं की बिजाई की थी। पानीपत जिले के इसराना हलके के मांडी गांव में 62 वर्षीय किसान गोवर्धन की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह खेत में गेहूं की थ्रेसिंग कराने को गया था। उसका शव गेहूं की फसल के ढेर के पास मिला। परिजनों ने बताया कि गोवर्धन की छह बीघे में गेहूं थी जो बरसात व ओलावृष्टि में खराब हो गई थी।