मनीमाजरा। कलाग्राम में चल रहे राष्ट्रीय शिल्प मेले की शुक्रवार की शाम पंजाब के मशहूर फोक-पॉप गायक मनमोहन वारिस के नाम रही। जैसे ही वारिस मंच पर आए और अपनी मधुर, दमदार आवाज में सुरों की लड़ियां सजानी शुरू कीं, ट्राइसिटी के दर्शक झूम उठे। उनके पॉप-फोक अंदाज का जादू ऐसा चला कि दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे।
अक्षय कुमार की फिल्म केसरी-2 के चर्चित गीत ‘कलेजे तीर देखन नू, ते सिर ते ताज देखन नू... से शुरुआत करते हुए वारिस ने माहौल में जो ऊर्जा भरी, वह पूरे प्रस्तुति के दौरान बनी रही। इसके बाद उन्होंने अपना हिट गीत ‘कल्ली बेह के सोची नी...’ सुनाया, तो दर्शक एक-एक लाइन पर झूमते नजर आए। उनका लोकप्रिय फोक नंबर ‘दो तारा वजदा वे...भी लोगों पर गहरी छाप छोड़ गया।
इसी कड़ी में जब वारिस ने दर्द और भावनाओं से भरा गीत ‘सुती पई नूं हिचकियां आणगियां...गाया तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। वारिस ने अपनी सुरों की उड़ान को आगे बढ़ाते हुए गीत ‘उड़जू उड़जू करदा...पेश किया, जिसने समां पूरी तरह अपने नाम कर लिया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं के दिलों को जैसे भीतर तक झंकृत कर दिया।
जो भी काम करे, उसे सिर्फ नौकरी की तरह नहीं बल्कि पैशन की तरह अपनाए
मंच से बातचीत करते हुए मनमोहन वारिस ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे माता-पिता की प्रेरणा और गुरुओं का मार्गदर्शन रहा।उन्हें परमात्मा ने आवाज का वरदान दिया और घर वालों ने उस हुनर को संवारने का मौका। जब उन्होंने संगीत को ही अपना जीवन मान लिया, तो उन्हें दुनिया भर के संगीत प्रेमियों का अपार प्यार मिला। वारिस का कहना था कि इंसान जो भी काम करे, उसे केवल नौकरी की तरह नहीं बल्कि पैशन की तरह अपनाए। मैं खुद गाने का मजा लेता हूं, तभी लोग भी उसे दिल से महसूस करते हैं।
युवाओं को सामाजिक संदेश
वारिस ने कार्यक्रम के दौरान अभिनेता-पहलवान दारा सिंह से जुड़े कुछ रोचक किस्से सुनाए और युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने अपने ‘पानी बचाओ’ और ‘बाल मजदूरी रोकथाम’ अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि कलाकार सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी साथ लेकर चलता है। उन्होंने बताया कि अपने भाइयों कमल हीर और संगतार के साथ वे वर्षों से दुनिया भर में मशहूर कार्यक्रम पंजाबी विरसा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसका मुख्य संदेश पारिवारिक प्रेम व संयुक्त परिवार की परंपरा को बढ़ावा देना है।