चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग के एक छात्र की ओर से आत्महत्या का प्रयास किए जाने से कैंपस में हड़कंप मच गया। छात्र ने आत्महत्या के प्रयास से पहले लिखे पत्र में विभाग की एक महिला प्रोफेसर पर लगातार बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पीड़ित छात्र ने लिखा है कि उसने कई बार विभाग और विश्वविद्यालय स्तर पर शिकायत की लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। छात्र के मुताबिक लगातार मानसिक दबाव और असहज माहौल के कारण उसने यह कदम उठाया।
देश में बढ़ते छात्र आत्महत्या के मामलों पर चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर संकेत करती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में देश में 13,000 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की जो चिंता बढ़ाने वाला आंकड़ा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने संस्थानों में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन तंत्र को मजबूत करने की बात कही थी लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव कम नजर आ रहा है।
अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं
मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक किसी ठोस कार्रवाई या जांच समिति के गठन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते छात्र को मदद मिल जाती, तो ऐसी घटना को टाला जा सकता था।
कैंपस में बहस छिड़ी
घटना के बाद पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा, काउंसलिंग सेवाओं, शिकायत निवारण प्रणाली और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देगा, ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।