इस गैलरी में प्रवेश द्वार पर भारतीय सेना के जवानों के बलिदान व बहादुरी के प्रतीक इंडिया गेट के एक बड़े मॉडल के साथ एक लड़ाकू विमान के मॉडल को रखा गया है। गैलरी के मुख्य प्रवेश द्वार पर तिरंगे के साथ कारगिल में बनाए गए युद्ध स्मारक की झलक देखने को मिलती है। दरवाजा खुलते ही सामने सियाचिन की बड़ी-बड़ी पहाड़ियों के दृश्य हैं।
सियाचिन की लड़ाई के हीरो परमवीर चक्र बाना सिंह की बहादुरी के किस्से इसमें बताए गए हैं। इसी गैलरी में कारगिल की अलग-अलग पहाड़ियों पर हुए युद्ध के दृश्य हैं। टाइगर हिल में भारतीय सेना व पाकिस्तानियों के बीच हुए युद्ध के दौरान वीर गति को प्राप्त हुए कैप्टन बिक्रम बत्रा व उसके साथियों के इस पहाड़ी को फतेह करने के दृश्य हैं।
कारगिल से पहले के युद्धों के बारे में भी बड़े-बड़े पोस्टर फ्रेम लगाकर जानकारी दी गई है। कर्नल एचपी सिंह ने बताया कि कारगिल के टाइगर हिल में भारत-पाकिस्तान के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। टाइगर हिल का कब्जा वापस लेने के लिए कई कुर्बानियां दी गईं।
इस गैलरी में कारगिल युद्ध के इतिहास को चित्रों, कलाकृतियों और 2डी और 3डी के अनुमानों में प्रदर्शित किया जाएगा। कारगिल युद्ध पर एक दस्तावेजी फिल्म भी बनाई गई है। गैलरी में इस फिल्मों को देखकर दर्शकों को युद्ध का जीवंत अनुभव होगा। इस गैलरी में भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर के दृश्य भी होंगे। जिस प्रकार कारगिल के युद्ध के दौरान सेना के जवानो ने रसियों के सहारे पहाड़ियां चढ़ीं, उसके दृश्य भी होंगे। इस दृश्यों को बनाने में फाइबर का प्रयोग किया गया है।
चौथी गैलरी अधूरी, सरकार से मांगे डेढ़ करोड़
वॉर मेमोरियल की चौथी गैलरी में बैटल ऑफ सारागढ़ी और जलियांवाला बाग हत्याकांड का वृत्तांत दिखाया जाना है। इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है, क्योंकि फंड की कमी आ गई है। कर्नल एचपी सिंह का कहना है की उन्होंने सरकार को पत्र लिख कर डेढ़ करोड़ की राशि की मांग की है, ताकि इस गैलरी का निर्माण पूरा हो सके।