समर्थक विधायक व अन्य नेता चाहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष हुड्डा रहें और प्रदेशाध्यक्ष भी उनकी पसंद का हो ताकि 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सत्ता में ला सकें। इस फार्मूले पर सहमति नहीं बन पा रही। आलाकमान भी प्रदेश में सभी दिग्गज नेताओं को संतुष्ट कर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में कोई घोषणा नहीं हो पा रही।
मंगलवार को भी पूरा दिन प्रदेशाध्यक्ष व अन्य पदों पर होने वाली नियुक्तियों को लेकर अटकलें जारी रहीं। देर रात तक कोई फैसला नहीं हो पाया। प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने अंतिम निर्णय आलाकमान पर छोड़ दिया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हुई हैं कि प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए किसके नाम पर मुहर लगती है। अनेक नेताओं के नाम की अटकलें लगाई जा रही हैं।
तकरार बढ़ी: हुड्डा इस बात पर अड़ गए हैं कि कांग्रेस को हरियाणा में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह उन भरोसा जताना होगा। इस बात का उदाहरण भी उन्होंने आलाकमान के सामने पेश किया है। यह भी कहा है कि 2019 चुनाव में टिकट बंटवारे में पूरी तरह चली होती तो कांग्रेस सरकार बनाती। दूसरे धड़े से आलाकमान का टकराव इस बात को लेकर भी हुआ कि नेता प्रतिपक्ष के साथ प्रदेश अध्यक्ष का पद हुड्डा खेमे को क्यों दिया जाए।
सधी हुई चाल चल रहे कुलदीप: इस पूरे प्रकरण में देखने वाली बात यह है कि कुलदीप बिश्नोई इस बार बहुत सधी हुई चाल चल रहे हैं। बिना किसी अनर्गल बयानबाजी के अनुशासन में रह कर अपनी बात कह रहे हैं। अपने पिता दिवंगत भजनलाल के समय की कार्यप्रणाली को आगे रख कर आलाकमान को यह बता रहे हैं कि छत्तीस बिरादरी के लिए उनका चेहरा पार्टी में उपयुक्त होगा।